नोएडा, 4 अप्रैल 2025 – केंद्र सरकार द्वारा संसद में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पारित किए जाने के बाद देश में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अफजाल अंसारी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस विधेयक को गैर-जरूरी बताते हुए इसका विरोध किया है।
वहीं, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस विधेयक को लेकर नाखुशी जताई है, लेकिन उन्होंने मुस्लिम समाज से शांति बनाए रखने की अपील की है। अब इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के फैसलों पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
अफजाल अंसारी ने जताया विरोध
संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सपा सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि इस विधेयक की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार वक्फ संपत्तियों को संरक्षित करना चाहती थी, तो इसके लिए अलग से कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती करना चाहती है।
उन्होंने कहा,
“सरकार ने इस विधेयक को यह कहकर लाया कि इससे अल्पसंख्यक महिलाओं को लाभ होगा, लेकिन जब पहले से ही महिला आरक्षण विधेयक पारित किया गया था, तो उसे अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया?”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वक्फ संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का अधिकार किन लोगों को दिया जाएगा और इससे किसे लाभ होगा।
अजय राय ने भी साधा निशाना
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने वक्फ संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में लाया गया कानून बताते हुए कहा कि इसमें विपक्ष की राय को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
“सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया और जो चाहा, वही कानून बना दिया। जनता अब सरकार की इस रणनीति को समझ चुकी है और इसका जवाब देगी।”
मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस विधेयक पर नाराजगी तो जताई है, लेकिन उन्होंने समाज से अमन और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है।
वाराणसी के मुफ्ती-ए-शहर अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा,
“यह विधेयक मुस्लिम समाज के हित में नहीं है, और इसमें कोई संशोधन भी इसे स्वीकार्य नहीं बना सकता। हालांकि, हम किसी भी तरह की अशांति नहीं चाहते।”
उन्होंने शुक्रवार की नमाज के मद्देनजर मुस्लिम समाज से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जो भी फैसला लेंगे, वे उसे मानेंगे।
इंताजामिया मसाजिद कमेटी के सचिव यासीन ने कहा कि उन्हें अब तक विधेयक की संशोधित प्रति नहीं मिली है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि यह कानून मुसलमानों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करेगा।
क्या है वक्फ संशोधन विधेयक?
वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पेश किया। सरकार का दावा है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं और जरूरतमंदों को अधिक अधिकार देगा। हालांकि, इस विधेयक को लेकर यह चिंता जताई जा रही है कि इससे वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती हो सकती है।
अब आगे क्या?
अब सभी की निगाहें इस मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के रुख पर टिकी हैं। मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि वे संगठनों के निर्णयों का सम्मान करेंगे और उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय करेंगे।
वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पर राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के तीखे विरोध के बावजूद, समाज के वरिष्ठ लोग शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस विधेयक को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा अन्य संगठनों का इस पर क्या रुख रहता है।

