बिहार के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक और बाहुबली नेता रीतलाल यादव ने आज सुबह आत्मसमर्पण कर दिया। वह पिछले कई दिनों से फरार चल रहे थे। रीतलाल यादव ने अपने सहयोगियों के साथ पटना के दानापुर व्यवहार न्यायालय में एसीजेएम प्रियंका कुमार के कोर्ट में सरेंडर किया।
यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब पटना में महागठबंधन की बैठक होनी है। पिछले पांच दिनों से पटना पुलिस राजद विधायक की तलाश में छापेमारी कर रही थी। इस बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता महागठबंधन पर सवाल उठा रहे थे।
पुलिस छापेमारी की वजह
11 अप्रैल को बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने रीतलाल यादव के पटना स्थित कोथवा आवास, कार्यालय और अन्य स्थानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में पुलिस ने 10.5 लाख रुपये नगद, 77 लाख रुपये का खाली चेक, संदिग्ध चेक, जमीन के कागजात और अन्य सामान बरामद किए थे। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई एक बिल्डर के शिकायत के आधार पर की गई थी, जिसने आरोप लगाया था कि रीतलाल यादव और उनके सहयोगियों ने उसे रंगदारी की मांग करते हुए धमकी दी थी।
रीतलाल यादव का आपराधिक इतिहास
रीतलाल यादव का नाम पहले भी विवादों और आपराधिक मामलों में आया है। 2003 में भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या में उनका नाम चर्चा में आया था। इसके बाद 2016 में वे जेल में रहते हुए एमएलसी चुनाव में भी शामिल हुए थे और जीत हासिल की थी। 2020 में राजद ने उन्हें दानापुर से विधानसभा चुनाव का टिकट दिया, जिसमें उन्होंने भाजपा की उम्मीदवार आशा सिन्हा को हराकर जीत हासिल की थी।
विधायक की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
रीतलाल यादव की पत्नी रिंकू देवी ने हाल ही में पटना पुलिस और बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि पुलिस उनके घर में अवैध हथियार जैसे AK-47 और AK-56 रखने की साजिश रच रही है ताकि उन्हें फंसाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने उनके घर में आतंकवादी या नक्सली के खिलाफ की गई कार्रवाई जैसी कार्रवाई की थी, लेकिन वहां कोई अवैध सामान नहीं मिला।
राजनीतिक प्रभाव
रीतलाल यादव का सरेंडर महागठबंधन की बैठक से ठीक पहले हुआ है, जिससे राजनीतिक विरोधी, खासकर NDA, महागठबंधन पर सवाल उठा रहे हैं कि यह समयबद्ध कार्रवाई क्यों की गई।
इस मामले में आगे की जांच जारी है और रीतलाल यादव के खिलाफ लगे आरोपों पर कार्रवाई की जाएगी।

