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UP: करणी सेना अध्यक्ष ओकेंद्र राणा की खुली धमकी – “जब तक तोड़ेंगे नहीं, छोड़ेंगे नहीं”

द्वारा: The KN News, अपडेट किया गया 28 अप्रैल 2025, 10:36 AM IST

आगरा: उत्तर प्रदेश में सियासी माहौल एक बार फिर गरमा गया है, जब करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली। इसके साथ ही राणा ने खुले तौर पर धमकी दी कि जब तक वह सपा और उसके नेताओं को “तोड़ नहीं देंगे,” तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे।

ओकेंद्र राणा की धमकी

ओकेंद्र राणा ने वीडियो में कहा, “हमने सपा सांसद रामजी लाल सुमन पर अलीगढ़ के गभाना टोल पर हमला किया है। यह हमला हमारे करणी सैनिकों द्वारा किया गया है, और हम इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं।” राणा ने प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बार-बार बचाने की कोशिश की जा रही है और यह सही नहीं है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करते हुए कहा कि गद्दारों को सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।

राणा ने आगे कहा, “हमारे पास जानकारी थी कि सुमन का काफिला आ रहा था। यदि हमें और कुछ देर पहले जानकारी मिलती तो कुछ और अच्छा होता। हमारा एक ही मकसद है – जब तक तोड़ेंगे नहीं, छोड़ेंगे नहीं। चाहे वह अखिलेश यादव हों, सुमन हों या फिर सपा का कोई भी पदाधिकारी, जो भी हमारे रडार पर आएगा, उसे हम धरती पर घुटने नहीं टिकने देंगे।”

सपा कार्यकर्ताओं की कड़ी प्रतिक्रिया

करणी सेना के इस हमले पर सपा कार्यकर्ताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा के नेताओं ने ओकेंद्र राणा और उनकी सेना को चेतावनी दी है कि वे इस तरह की धमकियों और हिंसा का विरोध करेंगे। सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रामजी लाल सुमन ने इस हमले के बाद आरोप लगाया कि यह हमला उनकी जान को निशाना बनाने के लिए किया गया था, और इसके पीछे सरकार की साजिश हो सकती है।

सपा के कार्यकर्ताओं ने कहा कि करणी सेना का यह हमला न केवल उनकी पार्टी के लिए, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रकार की हिंसा जारी रही, तो इसका जवाब सपा पूरी ताकत के साथ देगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

गभाना हमले का संदर्भ

यह हमला एक माह बाद हुआ है, जब मार्च में सपा सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। इस हमले में तोड़फोड़ और पथराव के दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। हालांकि, एक माह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे इस हमले की पुनरावृत्ति की आशंका थी। रविवार को गभाना में सुमन के काफिले पर फिर से हमला हुआ, जिसमें गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और टायर फेंके गए।

सपा और करणी सेना के बीच टकराव

सपा की ओर से आरोप लगाया है कि प्रशासन द्वारा कार्रवाई में नाकामी के कारण ही करणी सेना के लोग इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। रामजी लाल सुमन के बेटे रणजीत सिंह ने पहले हमले के बाद हरीपर्वत थाने में केस दर्ज कराया था, जिसमें जानलेवा हमला, तोड़फोड़ और अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। वहीं, करणी सेना के अध्यक्ष ओकेंद्र राणा पर भी मारपीट और तोड़फोड़ का आरोप था, लेकिन एक महीने के बाद भी इन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस जांच की स्थिति

डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि दोनों मामलों में विवेचना चल रही है और साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जाएगी।

समाजवादी पार्टी और करणी सेना के बीच बढ़ती तकरार उत्तर प्रदेश की राजनीति को और भी गर्म कर सकती है। यह हमले न केवल सपा और करणी सेना के बीच की सीधी टक्कर को दर्शाते हैं, बल्कि आगामी 2027 के चुनावी माहौल में भी जातीय और राजनीतिक संघर्ष को और तीव्र कर सकते हैं। ओकेंद्र राणा की धमकी और सपा नेताओं पर हमले की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि यूपी में राजनीतिक माहौल और भी उग्र हो सकता है।

The KN News इस मामले पर लगातार अपडेट प्रदान करेगा, ताकि पाठकों को हर नई जानकारी मिलती रहे।

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