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गाजीपुर न्यूज़ रिपोर्ट: महंगाई और ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे पारंपरिक व्यवसाय

📍 The KN NEWS | अपडेटेड: 13 मई 2025, 12:11 AM IST

गाजीपुर (जमानिया):
महंगाई की लगातार मार और ऑनलाइन रिटेल कंपनियों की बढ़ती पकड़ ने कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में वर्षों से जमे पारंपरिक किराना व्यवसायियों की नींव को हिला दिया है। एक समय जो दुकाने पूरे मोहल्ले की जरूरतें पूरी करती थीं, आज वहां ग्राहकों की संख्या घटती जा रही है और मुनाफा लगातार गिरता जा रहा है।

🔻 दुकानों में ग्राहक कम, खर्चा ज़्यादा

गांवों और कस्बों की इन दुकानों में अब वह भीड़ नहीं दिखती जो पहले सामान्य हुआ करती थी। जमानिया के किराना दुकानदार बताते हैं,

“जहां पहले 100 से अधिक ग्राहक रोज आते थे, अब मुश्किल से 50-60 ग्राहक ही पहुंचते हैं। पहले जो स्टॉक हफ्ते भर में खत्म हो जाता था, वह अब दो-दो हफ्ते तक पड़ा रह जाता है।”

उनका कहना है कि मुनाफा न के बराबर रह गया है और दुकान चलाने के खर्च — जैसे कि किराया, बिजली, परिवहन — दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

💸 महंगाई का सीधा असर

दाल, तेल, आटा, नमक, साबुन जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे उपभोक्ता पहले की तरह खुलकर खरीदारी नहीं कर पा रहे। उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति कमजोर हुई है, और इसका सीधा असर दुकानदारों की बिक्री पर पड़ा है।

📦 ऑनलाइन रिटेल की चुनौती

इधर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे फ्लिपकार्ट, अमेज़न और अन्य लोकल ऐप्स ने भारी छूट, मुफ्त होम डिलीवरी, आसान रिटर्न और डिजिटल भुगतान जैसे फीचर्स के ज़रिए कस्बों तक अपनी पैठ बना ली है।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि वे इस तरह की छूट और सुविधाएं नहीं दे सकते, जिससे ग्राहक अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

🏦 वित्तीय सहायता भी नहीं मिल रही

कई छोटे दुकानदारों को यह भी शिकायत है कि जब वे बैंक से व्यापार बढ़ाने के लिए ऋण लेने जाते हैं, तो उन्हें लंबी प्रक्रियाओं और सख्त शर्तों के कारण सहायता नहीं मिलती।

एक और किराना व्यवसायी कहते हैं,

“सरकारी योजनाओं की बात तो बहुत होती है, लेकिन हमें न तो सही जानकारी मिलती है और न ही बैंक वाले आसानी से लोन देते हैं।”

💳 डिजिटल तरीकों से बदलाव की कोशिश

कई दुकानदार अब डिजिटल भुगतान को अपनाकर ग्राहकों को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। QR कोड, UPI, Google Pay जैसी सुविधाएं अब कस्बों में भी देखने को मिल रही हैं। इसके साथ-साथ कुछ व्यापारी सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

हालांकि तकनीकी जानकारी की कमी और डिजिटल साक्षरता की समस्या अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है।

📢 व्यापार मंडल की मांग

नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष का कहना है कि सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।

“सरकार को चाहिए कि वह छोटे व्यापारियों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे, आसान और सस्ते ऋण की व्यवस्था करे, और व्यापारियों को डिजिटल युग के लिए प्रशिक्षण भी दे।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में परंपरागत किराना दुकानें पूरी तरह से गायब हो सकती हैं।


लोकल को बचाना जरूरी*

गांव और कस्बों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ये पारंपरिक दुकानें ही हैं। न केवल यह रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करती हैं, बल्कि स्थानीय रोजगार का भी एक बड़ा स्रोत हैं। ऐसे में इन दुकानों को समाप्त होने देना न तो सामाजिक दृष्टि से उचित है और न ही आर्थिक दृष्टि से।

सरकार, समाज और ग्राहक — तीनों को मिलकर ‘वोकल फॉर लोकल’ को सिर्फ नारा नहीं, व्यवहार में भी लाना होगा।


🗣️ The KN NEWS की अपील:
अपने मोहल्ले की दुकानों से खरीदारी करें। छोटे दुकानदारों को डिजिटल भुगतान में सहयोग दें। सरकार से ठोस नीतिगत समर्थन की मांग करें।

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