नई दिल्ली। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारों पर काम कर रहे जासूसी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई के तहत तीन दिनों में हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों पर भारत की सैन्य जानकारी और संवेदनशील सूचनाएं पाकिस्तान को भेजने का आरोप है।
गिरफ्तार लोगों की पृष्ठभूमि बेहद विविध है—इनमें यूट्यूबर, कॉलेज छात्र, मोबाइल ऐप डेवलपर, सुरक्षा गार्ड और आम नागरिक शामिल हैं।
जानिए कौन हैं ये 11 गिरफ्तार जासूस:
1. ज्योति मल्होत्रा (33), हिसार, हरियाणा
‘ट्रैवल विद जो’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाली ज्योति मल्होत्रा पर आरोप है कि उसने पाक उच्चायोग के अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ ‘दानिश’ के संपर्क में आकर सैन्य ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान को दी। ज्योति पाकिस्तान की प्रायोजित यात्राओं पर भी गई थी।
2. दवेंद्र सिंह ढिल्लों (25), कैथल, हरियाणा
खालसा कॉलेज पटियाला का छात्र दवेंद्र सिंह सोशल मीडिया पर हथियारों की तस्वीरें डालता था। वह पाकिस्तान की यात्रा कर चुका है और सेना के कैंटोनमेंट की तस्वीरें आईएसआई को भेजने का आरोपी है।
3. मोहम्मद मुर्तजा अली, जालंधर, पंजाब
गुजरात पुलिस ने मुर्तजा को गिरफ्तार किया है। उस पर एक मोबाइल ऐप बनाकर संवेदनशील जानकारियाँ पाकिस्तान को भेजने और उसके बदले पैसे लेने का आरोप है। उसने जांच से बचने के लिए कई सिम कार्ड इस्तेमाल किए।
4. गुज़ाला (31), मलेरकोटला, पंजाब
पाक उच्चायोग के अधिकारी दानिश द्वारा हनी ट्रैप में फंसाई गई गुज़ाला ने वीज़ा और पैसों के बदले में सैन्य ठिकानों से जुड़ी जानकारी साझा की।
5. यामिन मोहम्मद, पंजाब
यामिन की गतिविधियों की जांच अभी जारी है, लेकिन प्राथमिक जानकारी के अनुसार वह भी आईएसआई नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
6. शहजाद, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
यूपी एटीएस के अनुसार शहजाद सीमा पार तस्करी और आईएसआई को जानकारी देने में शामिल था। वह दूसरों को भी इस नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश करता था।
अन्य पांच आरोपी
बाकी के पांच आरोपियों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं क्योंकि जांच जारी है। इनमें एक सुरक्षा गार्ड, कुछ छात्र और हरियाणा व पंजाब के अन्य निवासी शामिल हैं। इन लोगों को सोशल मीडिया, पैसों की लालच और पाकिस्तान यात्रा के बहाने जाल में फंसाया गया।
तकनीकी तरीकों का उपयोग
जांच एजेंसियों के अनुसार, ये सभी लोग एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और डिजिटल पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करके जानकारी साझा करते थे, जिससे उनकी गतिविधियों का आसानी से पता नहीं चल सके।
विश्लेषण
इस घटना ने एक बार फिर भारत की आंतरिक सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विदेशी ताकतों के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला दर्शाता है कि कैसे सामान्य नागरिकों को भी आधुनिक तकनीकों और सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से देशविरोधी गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है।
(यह रिपोर्ट ANI और अन्य आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है।)

