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मुरादाबाद में पेट में छिपा सोना: अपहरण ने खोल दिया तस्करी का बड़ा राज**

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने न सिर्फ सोना तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही को भी उजागर कर दिया। यदि अपहरण की यह घटना सामने न आती, तो शायद यह मामला हमेशा के लिए दफन हो जाता। सऊदी अरब से लौटे छह लोगों में से चार के पेट से जब सोने के कैप्सूल बरामद हुए, तो हर कोई हैरान रह गया।


घटना का खुलासा: अपहरण से शुरू हुई कहानी

घटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब रामपुर जिले के टांडा बादली निवासी छह युवक — शाने आलम, मुतल्लवी, मोहम्मद नावेद, जाहिद अली, अजहरुद्दीन और जुल्फेकार — सऊदी अरब से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे। इन सभी ने एक साल पहले दुबई होते हुए सऊदी अरब में नौकरी शुरू की थी। शुक्रवार को वे भारत लौटे और एक कार से अपने घर की ओर रवाना हुए।

इस दौरान लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर पुराने टोल प्लाजा के पास बदमाशों ने उन्हें पेट में सोना होने के शक के आधार पर अगवा कर लिया। यही अपहरण, आगे चलकर पूरे सोना तस्करी रैकेट के भंडाफोड़ का कारण बना।


पुलिस की तत्परता से हुआ खुलासा

पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दो बदमाशों को गिरफ्तार किया और सभी बंधकों को सकुशल बचा लिया। पूछताछ में बदमाशों ने खुलासा किया कि उनके अनुसार अपहृत लोगों के पेट में सोना छिपाया गया है।

इसके बाद एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह के निर्देश पर छहों लोगों का पहले CHC मूंढापांडे और फिर निजी लैब और जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया गया। नतीजों ने पुलिस और जनता दोनों को चौंका दिया — चार युवकों के पेट में सोना होने की पुष्टि हुई।


कैसे छुपाया गया था सोना?

पुलिस के अनुसार, अब तक नौ कैप्सूल बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें से प्रत्येक कैप्सूल का वजन करीब 25 ग्राम है। इस तरह अब तक करीब सवा दो सौ ग्राम सोना पेट से निकाला जा चुका है।

डॉक्टरों ने बताया कि इन कैप्सूल्स को शरीर से निकालने के लिए तस्करों को दवा और भारी भोजन दिया जा रहा है। अनुमान है कि अभी इनके पेट में और भी कैप्सूल हो सकते हैं।


सुरक्षा एजेंसियों की विफलता पर सवाल

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये चारों युवक दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच एजेंसियों को चकमा देकर बाहर निकल आए। यह इस बात का संकेत है कि या तो जांच में बड़ी लापरवाही हुई, या फिर इसमें कुछ अंदरूनी मिलीभगत भी हो सकती है।


तस्करी की साजिश और मुखबिरी

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे तस्करी रैकेट की मुखबिरी टांडा कस्बे के ही कुछ लोगों ने की थी, जिनमें तस्करों के करीबी भी शामिल हैं। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।


परिजनों की भूमिका पर भी शक

जब पुलिस चारों तस्करों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, तो उनके परिजन भी वहां पहुंचे। लेकिन जैसे ही रिपोर्ट में सोना होने की पुष्टि हुई, सभी परिजन मौके से भाग निकले। इससे पुलिस को उनके सहयोग पर भी शक हुआ है।


अपहरण नहीं होता तो दफन हो जाता राज

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि भारत में तस्करी का जाल कितना गहराई से फैला हुआ है। अगर अपहरण की यह घटना सामने न आती, तो यह पूरी साजिश शायद कभी उजागर न होती।

इस प्रकरण से न केवल दिल्ली एयरपोर्ट की सुरक्षा जांच प्रणाली पर सवाल उठे हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना तस्करी के लिए पेट के भीतर कैप्सूल छिपाने का चलन अभी भी जारी है।


अब आगे क्या?

  • सभी आरोपियों का मेडिकल उपचार जारी है।
  • कस्टम विभाग को पूरी जानकारी दे दी गई है।
  • तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस और एजेंसियां संयुक्त जांच में जुटी हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन व्यक्तियों की पृष्ठभूमि और संपर्कों की जांच की जा रही है।

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