प्रयागराज/कौशांबी | 26 जून 2025
समाजवादी पार्टी (सपा) ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले तीन बागी विधायकों पर कार्रवाई की है। इनमें मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह और अभय प्रताप सिंह को पार्टी से निकाल दिया गया है। लेकिन चायल (कौशांबी) की सपा विधायक पूजा पाल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है मामला?
राज्यसभा चुनाव 2024 में सपा के सात विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोट दिया था। इनमें चायल की विधायक पूजा पाल भी शामिल थीं। इसके बावजूद सपा ने अभी तक उन पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया।
पूजा पाल को क्यों बख्शा गया?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा इस समय पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। पूजा पाल का संबंध पाल बिरादरी से है, जो यूपी के कई क्षेत्रों में प्रभावशाली मानी जाती है।
इसके अलावा, पूजा पाल ने पार्टी के खिलाफ कभी खुलेआम बयान नहीं दिए, जिससे उन्हें “अच्छे व्यवहार वाली बागी” माना गया है।
भाजपा से नजदीकियां
हालांकि पूजा पाल को कई बार भाजपा नेताओं के साथ देखा गया है। वे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ मंच पर नजर आईं और लोहंदा कांड में उन्होंने पीड़िता को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी। इससे साफ है कि वे भाजपा के करीब जाती दिख रही हैं।
सपा महासचिव का बयान
सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज ने कहा कि क्रॉस वोटिंग करने वाले कुल 10 विधायक थे, लेकिन अभी सिर्फ 3 पर ही कार्रवाई हुई है। बाकी पर क्या फैसला लिया जाएगा, यह पार्टी अध्यक्ष तय करेंगे।
सपा की यह नरमी दिखाती है कि पार्टी अनुशासन से ज्यादा सामाजिक और चुनावी समीकरणों को प्राथमिकता दे रही है। पूजा पाल पर कार्रवाई न करना पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी विशेष वर्ग की नाराजगी न झेली जाए।

