📰 THE KN NEWS | गाज़ीपुर ब्रेकिंग न्यूज़
📅 दिनांक: 7 अगस्त 2025 |
गाजीपुर।
रामसरेखा हत्याकांड की चल रही सुनवाई में लापरवाही बरतने पर शादियाबाद थाना प्रभारी निरीक्षक श्यामजी यादव के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम शक्ति सिंह की अदालत ने बुधवार को जारी किया। न्यायालय ने इसे एक गंभीर न्यायिक अवमानना मानते हुए CO भुड़कुड़ा को प्रभारी निरीक्षक की गिरफ्तारी कर 22 अगस्त को न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
6 साल पुराना हत्याकांड, 13 बार कोर्ट बुलावा, फिर भी नहीं पहुँचे इंस्पेक्टर
यह मामला वर्ष 2019 में मरदह थाना क्षेत्र के रामसरेखा हत्याकांड से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई वर्तमान में चल रही है।
- प्रभारी निरीक्षक श्यामजी यादव इस केस में मुख्य गवाह हैं।
- इन्होंने अपना बयान तो दर्ज करा दिया, लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन (जिरह) के लिए अब तक 13 बार निर्धारित तारीखों पर कोर्ट में अनुपस्थित रहे।
- इन तारीखों में 9 जनवरी से लेकर अब तक सभी पेशियों में वह गैरहाजिर रहे, जबकि वह इसी जिले में शादियाबाद थाने में कार्यरत हैं।
⚖️ अदालत ने क्या कहा?
न्यायालय ने अपने आदेश में लिखा कि—
“प्रभारी निरीक्षक न्यायिक प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। उनका यह रवैया अत्यंत आपत्तिजनक है और कानून व्यवस्था के जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी से यह कदापि स्वीकार्य नहीं।”
🛑 गिरफ्तारी और वेतन पर रोक का आदेश
कोर्ट ने न केवल गैर-जमानती वारंट जारी किया है, बल्कि उनके वेतन भुगतान पर भी रोक लगाने का आदेश कोषागार को दे दिया है।
अब भुड़कुड़ा के क्षेत्राधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह श्यामजी यादव को गिरफ्तार कर 22 अगस्त को अदालत में प्रस्तुत करें।
🔎 The KN NEWS की विशेष रिपोर्ट:
रामसरेखा हत्याकांड में पहले ही काफी विलंब हो चुका है। ऐसे में एक सरकारी गवाह द्वारा कोर्ट के समन की लगातार अनदेखी न्याय प्रक्रिया का मखौल उड़ाने जैसा है।
क्या यह पुलिस विभाग में जवाबदेही की कमी का संकेत है?
क्या अदालत के आदेश के बावजूद अधिकारी इस तरह से बचते रह सकते हैं?
📌 जनता की नजर में सवाल:
- क्या श्यामजी यादव को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
- क्या अन्य मामलों में भी इसी तरह का रवैया अपनाया गया है?
- आखिर क्यों एक जिम्मेदार अधिकारी न्यायालय के आदेशों को हल्के में ले रहे हैं?
📣 The KN NEWS की मांग:
गाजीपुर की जनता और न्याय प्रणाली की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। हम प्रशासन और सरकार से अपील करते हैं कि इस मामले में जल्द और पारदर्शी कार्रवाई की जाए।
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