लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों सड़कों पर लगे होर्डिंग्स और पोस्टरों के जरिए गरमा गई है। राजधानी लखनऊ में शनिवार को जहां भाजपा नेताओं ने बड़े पैमाने पर ‘आई लव योगी आदित्यनाथ’ और ‘आई लव बुलडोजर’ लिखे पोस्टर लगाए थे, वहीं रविवार की सुबह समाजवादी पार्टी ने इसका जवाब अपने अंदाज में दिया। सपा कार्यालय के बाहर और शहर के अलग-अलग हिस्सों में ‘आई लव अखिलेश यादव’, ‘आई लव पीडीए’ और ‘आई लव शिक्षा, विकास, रोजगार’ जैसे नारे लिखे होर्डिंग्स दिखाई दिए।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें 9 सितंबर को कानपुर से जुड़ी हैं। बारावफात जुलूस के दौरान सार्वजनिक मार्गों पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर लगाए गए थे। पुलिस ने इसे लेकर नौ नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर दिया। मामला धीरे-धीरे बढ़ता गया और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कहा कि “आई लव मोहम्मद कहना अपराध नहीं हो सकता।” इसके बाद यह विवाद यूपी से निकलकर उत्तराखंड और कर्नाटक तक जा पहुंचा, जहां विरोध और पुलिस की सख्ती दोनों देखने को मिलीं।
भाजपा का जवाब: ‘आई लव योगी’ और ‘आई लव बुलडोजर’
कानपुर विवाद के बाद शनिवार को भाजपा नेताओं ने राजधानी लखनऊ की दीवारों और चौराहों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में पोस्टर लगाए। इनमें बड़े अक्षरों में लिखा था –
- ‘आई लव योगी आदित्यनाथ’
- ‘आई लव बुलडोजर’
इन होर्डिंग्स का सीधा संदेश था कि भाजपा सीएम योगी की ‘बुलडोजर नीति’ और कड़े प्रशासनिक रुख को जनता के बीच लोकप्रिय बताना चाहती है।
सपा का पलटवार: ‘आई लव अखिलेश’ और ‘आई लव पीडीए’
भाजपा के पोस्टरों के महज 24 घंटे बाद ही समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया। रविवार की सुबह राजधानी में ‘आई लव अखिलेश यादव’, ‘आई लव पीडीए’, ‘आई लव शिक्षा, विकास, रोजगार’ जैसे पोस्टर लगाए गए।
यह होर्डिंग्स सपा लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव विवेक सिंह यादव और सपा के पूर्व प्रदेश सचिव अबनींद्र यादव की ओर से लगवाए गए हैं। सपा नेताओं का दावा है कि उनका संदेश भाजपा की “धमकी और बुलडोजर राजनीति” के मुकाबले विकास, रोजगार और शिक्षा पर केंद्रित है।
पोस्टर पॉलिटिक्स पर चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में होर्डिंग्स और पोस्टरों के जरिए जवाब देना अब एक आम रणनीति बन चुकी है। बीते चुनावों से लेकर मौजूदा समय तक सड़कों पर पोस्टरबाजी को ‘कोल्ड वार’ का नया रूप माना जा रहा है। भाजपा जहां योगी आदित्यनाथ के चेहरे और ‘बुलडोजर’ ब्रांडिंग पर जोर देती है, वहीं सपा खुद को PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और विकास के मुद्दों पर खड़ा करने की कोशिश कर रही है।
आगे क्या?
सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह पोस्टर पॉलिटिक्स और तेज होगी। भाजपा और सपा दोनों ही एक-दूसरे को जवाब देने के लिए लगातार नए नारे और नए होर्डिंग्स पेश कर सकती हैं। फिलहाल, लखनऊ की दीवारें और चौराहे दोनों दलों की पोस्टर जंग के गवाह बन चुके हैं।
👉 यह साफ है कि यूपी की राजनीति में अब सिर्फ भाषण और रैलियां ही नहीं, बल्कि ‘आई लव’ पोस्टर भी जनता को संदेश देने का नया हथियार बन गए हैं।

