पटना | The KN News रिपोर्ट | 15 अक्टूबर 2025
बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्म है।
राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है — मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ विपक्ष किस चेहरे के साथ मैदान में उतरेगा?
क्या तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन फिर से लौटेगा, या राहुल गांधी के नेतृत्व वाला I.N.D.I.A. (Indian National Developmental Inclusive Alliance) इस बार चुनावी बिसात संभालेगा?
इसका जवाब आज शाम तक मिल सकता है, क्योंकि विपक्षी दलों की अहम बैठक पटना में हो रही है, जहां सीट बंटवारे और नेतृत्व दोनों पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
🔹 सीट बंटवारे पर टकराव, लेकिन लालू यादव फिर भी सक्रिय
बिहार में विपक्षी खेमे के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर कई दिनों से मंथन जारी है।
हालांकि, आधिकारिक सहमति से पहले ही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पार्टी उम्मीदवारों को चुनावी सिम्बल बांटना शुरू कर दिया।
कांग्रेस की नाराज़गी के बाद खबर फैली कि तेजस्वी यादव ने सिम्बल वापस मंगा लिया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि लालू यादव ने उसके बाद भी वितरण जारी रखा।
यानी यह संकेत साफ है — लालू प्रसाद यादव अभी भी बिहार के विपक्षी समीकरण के सबसे प्रभावी खिलाड़ी हैं।
🔹 I.N.D.I.A. बनाम महागठबंधन – नाम में ही छिपी सियासत
बिहार में विपक्षी दलों के गठबंधन को लेकर दो नाम लगातार चल रहे हैं —
- महागठबंधन (Grand Alliance)
- I.N.D.I.A. (Indian National Developmental Inclusive Alliance)
लोकसभा चुनाव 2024 तक लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने महागठबंधन की कमान संभाले रखी थी।
लेकिन अब कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, बिहार विधानसभा चुनाव में I.N.D.I.A. को प्रमुख चेहरा बनाना चाहते हैं।
राहुल गांधी की हालिया यात्राओं और भाषणों में बार-बार यह शब्द गूंजा है — “इंडिया जीतेगा, बिहार बदलेगा।”
आज सीटों का बंटवारा तय करेगा कि बिहार में विपक्ष किस नाम से मैदान में उतरता है —
क्या यह लालू-तेजस्वी का महागठबंधन रहेगा या राहुल गांधी का I.N.D.I.A. एलायंस।
🔹 कांग्रेस बनाम राजद की अंदरूनी खींचतान
कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन का नाम और चेहरा राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप हो, ताकि राहुल गांधी के अभियान को बिहार में भी मजबूती मिले।
वहीं, राजद का मानना है कि बिहार में स्थानीय नेतृत्व और तेजस्वी यादव ही सबसे बड़ा चेहरा हैं।
राजद के वरिष्ठ नेताओं का कहना है —
“बिहार में जनता तेजस्वी यादव को जानती है, न कि दिल्ली से चलने वाले I.N.D.I.A. एलायंस को।”
कांग्रेस के रणनीतिकारों का जवाब है —
“अगर बिहार को बदलाव चाहिए तो राष्ट्रीय दृष्टिकोण जरूरी है। राहुल गांधी ही विपक्ष के सर्वमान्य नेता हैं।”
🔹 तेजस्वी यादव ही विपक्षी चेहरा, लेकिन कांग्रेस का असमंजस
बिहार में विपक्ष के पास फिलहाल मुख्यमंत्री पद के लिए कोई और विकल्प नहीं है।
भले कांग्रेस तेजस्वी यादव के नाम की खुलकर घोषणा न करे, लेकिन अंदरखाने में यही माना जा रहा है कि गठबंधन में सभी उम्मीदवार तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने The KN News से बातचीत में कहा —
“हम संगठन की बात करेंगे, लेकिन मैदान में चेहरा तेजस्वी ही होंगे।”
🔹 महागठबंधन की जड़ें और I.N.D.I.A. की शुरुआत
‘महागठबंधन’ शब्द बिहार की राजनीति में नया नहीं है।
लालू प्रसाद यादव ने वर्षों पहले कांग्रेस, वामपंथी दलों और जदयू के साथ मिलकर यह गठबंधन बनाया था।
दो बार नीतीश कुमार भी इसी महागठबंधन के सहारे मुख्यमंत्री बने।
2023 में नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाया — उन्होंने पटना में देशभर के विपक्षी दलों को एक साथ बुलाया।
उसी बैठक से I.N.D.I.A. नामक राष्ट्रीय गठबंधन की नींव रखी गई।
हालांकि, जब इस नाम में देश का नाम “India” जोड़ा गया, तो नीतीश कुमार ने विरोध जताते हुए इसे “अनुचित” बताया और बाद में गठबंधन से अलग हो गए।
🔹 NDA बनाम विपक्ष – सीट बंटवारे में दोनों खेमों की मुश्किलें
जहां एनडीए में जेडीयू और बीजेपी के बीच सीटों को लेकर ‘मंथन’ जारी है, वहीं विपक्षी खेमे में भी तालमेल का संकट है।
सूत्रों के अनुसार —
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) 12 सीटें मांग रहा है, जबकि कांग्रेस उन्हें सिर्फ 2 देना चाहती है।
- आम आदमी पार्टी अभी भी गठबंधन में शामिल नहीं हुई है।
- लोक जनशक्ति पार्टी (राष्ट्रीय) के प्रवेश को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है।
इसलिए आज की बैठक के बाद ही तय होगा कि बिहार में विपक्ष का चेहरा I.N.D.I.A. कहलाएगा या महागठबंधन।
🔹 लालू प्रसाद यादव की रणनीति फिर केंद्र में
लालू यादव ने भले उम्र और बीमारी के चलते सक्रिय राजनीति से दूरी बना रखी हो, लेकिन बिहार के चुनावी समीकरण में उनकी भूमिका अब भी निर्णायक है।
वे खुद सीट बंटवारे पर व्यक्तिगत रूप से निगरानी रख रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि कई कांग्रेसी उम्मीदवारों के नाम पर भी उनकी अंतिम मंजूरी ली जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि —
“लालू प्रसाद यादव की स्वीकार्यता और तेजस्वी यादव की युवा छवि, दोनों मिलकर ही विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत हैं।”
🔹 NDA की ओर से भी खेमेबंदी तेज
उधर एनडीए खेमे में भी सबकुछ सहज नहीं है।
जेडीयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने सार्वजनिक तौर पर कहा —
“सीट बंटवारे पर पुनर्मंथन की जरूरत है। मैं इस मुद्दे पर दिल्ली जा रहा हूं।”
हालांकि, जेडीयू प्रवक्ता संजय झा का कहना है —
“एनडीए पूरी तरह एकजुट है। जल्द ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जाएगी।”
इस बयान से साफ है कि सत्ता पक्ष में भी अंतर्विरोध मौजूद हैं।
🔹 राजनीतिक विश्लेषण: चुनाव 2025 में ‘लोकल बनाम नेशनल’ की लड़ाई
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 एक दिलचस्प मोड़ पर है —
यह सिर्फ नीतीश बनाम तेजस्वी की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि स्थानीय बनाम राष्ट्रीय रणनीति की भी टक्कर होगी।
- कांग्रेस राष्ट्रीय चेहरे (राहुल गांधी) और “I.N.D.I.A.” के ब्रांड को आगे लाना चाहती है।
- राजद बिहार की जमीनी राजनीति में अपनी पकड़ और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता पर भरोसा कर रहा है।
यह भी कहा जा रहा है कि अगर दोनों दलों में आपसी समझ नहीं बनती, तो विपक्ष का वोटबैंक बिखर सकता है — जिससे सीधा फायदा एनडीए को होगा।
आज होने वाली विपक्षी बैठक के बाद बिहार की चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी।
यह तय होगा कि आगामी चुनाव में जनता को “महागठबंधन बनाम एनडीए” देखने को मिलेगा या “I.N.D.I.A. एलायंस बनाम एनडीए”।
बहरहाल, एक बात तो तय है —
लालू प्रसाद यादव अभी भी बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावी शख्स हैं, और
तेजस्वी यादव विपक्ष के निर्विवाद चेहरा।
अब देखना है कि राहुल गांधी का राष्ट्रीय समीकरण बिहार में कितनी पकड़ बना पाता है।

