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गोमती नदी सफाई, महंगाई और किसानों के मुद्दे पर अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला

लखनऊ, 15 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश में गोमती नदी की सफाई और महंगाई को लेकर सियासत गरमाई हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोमती पुनर्जीवन योजना की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य सीवर और गंदे पानी को सीधे नदी में गिरने से रोकना है। लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लेकर सरकार पर तीखी आलोचना की है।

अखिलेश यादव ने कहा, “अब बताइए, अगर सीवर गोमती में नहीं गिरेगा तो कहां गिरेगा? यह योजना केवल दिखावा है। सरकार को केवल अपने कार्यकाल के अंत में नदियों की याद आई है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि समाजवादी सरकार के दौरान गोमती और वरुणा नदियों के लिए जो मॉडल तैयार किया गया था, वही वास्तविक और कारगर था।

यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केवल बजट की सफाई कर रही है, नदियों की नहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार हर अच्छी पहल को बर्बाद करने और निजी लाभ के लिए बदलने की कोशिश कर रही है। बड़े बिजनेस घरानों को रियल एस्टेट और भूमि बैंक बनाने की खुली छूट दी जा रही है, जबकि किसानों की जमीन और फसलें लूटी जा रही हैं।

महंगाई पर निशाना:
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों को लेकर अखिलेश यादव ने डबल इंजन सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चेतावनी दी कि दीपावली तक सोने का भाव 1.5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे गरीब लोग अपनी बेटी की शादी तक मुश्किल से कर पाएंगे। यादव ने कहा कि सरकार केवल स्वदेशी का झूठा प्रचार कर रही है, जबकि नीतियां विदेशी हितों के अनुकूल हैं।

किसानों की समस्याओं पर हमला:
अखिलेश यादव ने किसानों के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर इको सिस्टम का वादा केवल दिखावा है। किसानों को खाद नहीं मिल रही, गन्ने की कीमत नहीं बढ़ी और सरकार केवल बड़े व्यापारिक घरानों को फायदा पहुंचा रही है।

कानून व्यवस्था और प्रशासनिक आरोप:
यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावशाली नहीं है और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका रवैया केवल निजी और कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला है, जबकि आम जनता और किसानों के हितों की कोई चिंता नहीं है।

इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में गोमती पुनर्जीवन योजना और महंगाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की यह आलोचना आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा सरकार के लिए चुनौती बन सकती है।

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