दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी ने ‘युवा उड़ान योजना’ का ऐलान किया है, जिसके तहत अगर पार्टी सत्ता में आती है तो दिल्ली के हर शिक्षित बेरोजगार युवक को एक साल तक प्रति माह 8,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
कांग्रेस के महासचिव सचिन पायलट ने दिल्ली में पार्टी के दफ्तर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस योजना का ऐलान किया। उनके साथ कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी काज़ी निज़ामुद्दीन और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव भी मौजूद थे। पायलट ने कहा, “यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह शिक्षित युवाओं को समर्थन दे। इस कारण से, कांग्रेस सरकार बनने पर हम हर बेरोजगार और शिक्षित युवक को एक साल की अवधि के लिए प्रशिक्षु के रूप में वित्तीय सहायता देंगे।”
उन्होंने बताया कि इस एक साल के दौरान युवाओं को उनके कौशल में सुधार और उन्हें अपने क्षेत्र में दक्ष बनाने का अवसर मिलेगा। पायलट ने केंद्र और राज्य सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा, “रोज़गार सृजन किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन दोनों सरकारों ने बेरोजगारी के मुद्दे की अनदेखी की है।”
पायलट ने बीजेपी और आम आदमी पार्टी (AAP) पर आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां युवाओं के रोजगार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी। उन्होंने कहा, “आज दिल्ली की राजनीति आरोप-प्रत्यारोप का खेल बन चुकी है, लेकिन अब लोग एक बेहतर विकल्प की तलाश कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि वे आगामी चुनावों में कांग्रेस को चुनेंगे।”
कांग्रेस पार्टी के दिल्ली प्रभारी काज़ी निज़ामुद्दीन ने इस योजना को युवाओं के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता बताया और कहा, “हमने यह योजना बहुत सोच-समझकर तैयार की है। यह उन शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए है जो रोजगार पाने में संघर्ष कर रहे हैं। इस योजना के तहत, युवाओं को महीने में 8,500 रुपये मिलेंगे और हमारा प्रयास होगा कि उनका कौशल विकास हो, ताकि वे भविष्य में योग्य रोजगार प्राप्त कर सकें।”
इससे पहले कांग्रेस ने ‘प्यारी दीदी योजना’ और ‘जीवन रक्षा योजना’ का भी ऐलान किया था। प्यारी दीदी योजना के तहत कांग्रेस ने महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया है, जबकि जीवन रक्षा योजना के तहत हर निवासी को 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करने की बात की है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 5 फरवरी को होंगे और मतगणना 8 फरवरी को होगी। 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 62 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी, जबकि बीजेपी ने केवल 8 सीटें जीती थीं और कांग्रेस को दोनों चुनावों में एक भी सीट नहीं मिली थी।
कांग्रेस पार्टी का यह कदम दिल्ली में युवाओं को आकर्षित करने और चुनावी मैदान में अपनी स्थिति को मजबूत करने की ओर एक महत्वपूर्ण पहल है।

