Headlines

महाकुंभ में मुलायम सिंह यादव की मूर्ति पर विवाद: साधु-संतों ने उठाए आपत्ति

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की मूर्ति को महाकुंभ क्षेत्र में स्थापित करने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। यह मूर्ति शनिवार (11 जनवरी) को महाकुंभ के सेक्टर 16 स्थित एक शिविर में स्थापित की गई। इस मूर्ति का उद्घाटन मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता, माता प्रसाद पांडे ने किया।

मूर्ति की स्थापना के बाद कई संतों ने इसका विरोध करते हुए इसे ‘anti-Hindu’ और ‘anti-Sanatan’ करार दिया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस मूर्ति की स्थापना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव हमेशा हिंदू धर्म और सनातन के विरोधी रहे हैं और उनका रुख मुस्लिम समुदाय के पक्ष में रहा है।

महंत रवींद्र पुरी की आपत्ति

महंत रवींद्र पुरी ने कहा, “मुलायम सिंह यादव ने हमेशा हिंदू धर्म और सनातन धर्म के खिलाफ बयान दिए हैं। उनके शासनकाल में कई ऐसे घटनाएं घटीं, जिनसे संत समाज आहत हुआ। राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका को सभी जानते हैं। यह मूर्ति स्थापित करने का क्या उद्देश्य है, यह समझ से परे है।”

उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी द्वारा इस मूर्ति को महाकुंभ क्षेत्र में स्थापित करना संतों के साथ एक प्रकार की शरारत है और यह हिन्दू समाज की भावना को आहत करता है।

सपा नेता का बचाव

इस विवाद के बीच, सपा नेता माता प्रसाद पांडे ने मूर्ति की स्थापना का बचाव किया। उन्होंने कहा, “यह मूर्ति केवल एक प्रतीकात्मक है और यह मुलायम सिंह यादव के विचारों और उनके योगदान को प्रचारित करने के लिए स्थापित की गई है। महाकुंभ में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए यह एक स्वागत का हिस्सा है, जहां वे रुककर भोजन कर सकते हैं और आराम कर सकते हैं। मूर्ति को महाकुंभ के बाद सपा कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।”

समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव का योगदान

मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में तीन बार सेवा दी। उनका राजनीतिक करियर बहुत लंबा और प्रभावशाली रहा। वे भारतीय राजनीति के एक बड़े नेता माने जाते हैं और समाजवादी विचारधारा के समर्थक रहे हैं। उनका योगदान उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण रहा, लेकिन उनकी धार्मिक नीतियों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद उनके योगदान को याद किया जाता है, लेकिन उनके बारे में धर्म और राजनीति के मुद्दे आज भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

संप्रदायिक विवाद और तीर्थयात्रियों की प्रतिक्रिया

महाकुंभ जैसे पवित्र अवसर पर इस मूर्ति की स्थापना ने धार्मिक समुदायों में असंतोष उत्पन्न कर दिया है। जहां कुछ लोग इसे मुलायम सिंह यादव के योगदान के रूप में देख रहे हैं, वहीं बहुत से संत इसे हिंदू समाज की भावनाओं के खिलाफ मानते हैं।

अब यह देखना होगा कि इस विवाद का राजनीतिक और धार्मिक परिप्रेक्ष्य में क्या असर पड़ेगा और समाजवादी पार्टी के इस कदम पर आगे क्या प्रतिक्रिया होती है।

Don’t miss these tips!

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *