नई दिल्ली: बुधवार को एक टीवी डिबेट के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक रितुराज झा के बारे में भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) ने भाजपा से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जेडीयू ने आरोप लगाया कि पूनावाला के इस बयान से पूर्वांचल समुदाय के लोगों में गहरी नाराजगी उत्पन्न हुई है।
जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने एक बयान में कहा, “पूनावाला ने गलती की है। उनकी टिप्पणी से पूर्वांचल के लोगों में गहरा असंतोष पैदा हुआ है। हम भाजपा नेतृत्व से इस मामले में उचित कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।”
विवाद की शुरुआत
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को एक गर्मागरम टीवी डिबेट के दौरान शहजाद पूनावाला ने रितुराज झा के उपनाम पर तंज कसते हुए टिप्पणी की। इस टिप्पणी के बाद, जब झा ने पूनावाला के उपनाम का इस्तेमाल कर उन पर पलटवार किया, तो इसे आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी करार दिया।
पूनावाला ने हालांकि इस आरोप से इनकार किया और कहा कि उन्होंने किसी को भी गाली नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP उनके खिलाफ झूठ फैला रही है और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इस घटनाक्रम ने भाजपा के भीतर भी आलोचना का सामना किया है।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी की निंदा
भा.ज.पा. के पूर्वी दिल्ली से सांसद और प्रमुख पूर्वांचल नेता मनोज तिवारी ने शहजाद पूनावाला की टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। तिवारी ने कहा कि यह बयान न केवल अपमानजनक था, बल्कि पूर्वांचल समुदाय की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला था। उन्होंने पूनावाला और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से इस मामले में माफी मांगने की अपील की।
मनोज तिवारी ने कहा, “पूर्वांचल के लोग अपने सम्मान और पहचान के लिए किसी भी प्रकार की अपमानजनक टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। भाजपा को चाहिए कि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करे और दोषी व्यक्ति से माफी मांगने के लिए कहे।”
भाजपा नेतृत्व का रुख
इस विवाद के बाद भाजपा के अंदर भी कुछ नेताओं ने शहजाद पूनावाला की टिप्पणी को गलत बताया है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मामले को सुलझाने के लिए जल्द कोई कदम उठा सकती है, ताकि गठबंधन के रिश्ते प्रभावित न हों।
शहजाद पूनावाला के बयान ने ना केवल AAP बल्कि भाजपा के भीतर भी विवाद पैदा कर दिया है। जेडीयू और अन्य नेताओं द्वारा की गई आलोचना से यह साफ होता है कि इस प्रकार के विवादों का राजनीतिक प्रभाव काफी दूरगामी हो सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या इस विवाद का समाधान शीघ्रता से किया जाता है।

