गाजीपुर, 27 जनवरी 2025। जिला पंचायत की बैठक में भाजपा नेता पंकज सिंह चंचल ने अपनी राजनीति की कड़ी सूझबूझ का परिचय देते हुए विपक्ष को हराकर एक बार फिर भाजपा के पक्ष में बाजी पलट दी है। सोमवार को हुई जिला पंचायत की बैठक में 125 करोड़ रुपये के बजट को सर्वसम्मति से पास कराकर पंकज सिंह चंचल ने यह साबित कर दिया कि उनका राजनीतिक दबदबा अब भी बरकरार है।
पिछले दो महीनों से जिला पंचायत के करीब ढाई दर्जन सदस्य भाजपा के कुछ शुभचिंतकों के साथ मिलकर अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। इसके अलावा, पिछली बैठक में भी जिला पंचायत के कुछ सदस्यों ने हंगामा कर बैठक को स्थगित करवा दिया था। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा होने लगी थी कि इस बार विपक्ष ने कुछ अदृश्य शक्तियों का सहारा लेकर मजबूत चक्रव्यूह रचा है, जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह को फंसाया जा सकता था।
अवकाश प्रस्ताव की चर्चा तक की जा रही थी, लेकिन भाजपा नेता पंकज सिंह चंचल ने मोर्चा संभालते हुए विपक्ष के खिलाफ आक्रमण की रणनीति बनाई। उन्होंने लगातार जिला पंचायत सदस्यों से संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और समाधान पर विचार-विमर्श किया। इस निरंतर वार्ता और प्रयासों के बाद पंकज सिंह चंचल ने सभी विरोधी सदस्यों को अपने पक्ष में लाने में सफलता प्राप्त की।
सिर्फ राजनीतिक माहौल को संभालने में ही नहीं, बल्कि अपनी कार्यकुशलता से पंकज सिंह चंचल ने यह सिद्ध कर दिया कि वह सिर्फ भाजपा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गाजीपुर जिले के लिए एक मजबूत नेता हैं। सोमवार की बैठक में बजट को सर्वसम्मति से पास कराकर उन्होंने विपक्ष को हराया और भाजपा के राजनीतिक प्रभाव को पुनः स्थापित किया।
यह गौर करने वाली बात है कि पंकज सिंह चंचल ने भाजपा का टिकट हासिल करने के बाद निर्दल से चुनाव लड़ा और महज सात-आठ भाजपा सदस्यों के साथ कुल 67 में से 47 मत प्राप्त कर भारी जीत दर्ज की। इसके मुकाबले समाजवादी पार्टी के बैनर तले 32 सदस्य जीत हासिल करने में सफल रहे थे। इस प्रकार, पंकज सिंह चंचल ने न सिर्फ अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया, बल्कि भाजपा के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर पैदा किया।
अब यह स्पष्ट है कि पंकज सिंह चंचल की रणनीतिक सोच और राजनीतिक सूझबूझ से भाजपा ने एक बार फिर गाजीपुर में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पंकज सिंह चंचल के इस सफल नेतृत्व का असर आगामी चुनावों पर किस तरह पड़ता है।

