प्रयागराज: किन्नर अखाड़ा के प्रमुख रिषि अजय दास ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ममता कुलकर्णी और लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी को महामंडलेश्वर पद से हटा दिया है। यह निर्णय किन्नर अखाड़ा की परंपराओं और आस्थाओं के उल्लंघन के चलते लिया गया। रिषि अजय दास ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में दोनों के खिलाफ ‘देशद्रोह’ का आरोप लगाते हुए उनके पद से निष्कासन की घोषणा की।
ममता कुलकर्णी और लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की नियुक्ति पर सवाल
ममता कुलकर्णी, जो कि एक समय बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं, को महामंडलेश्वर के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि, रिषि अजय दास का कहना है कि उनकी नियुक्ति धार्मिक परंपराओं और अखाड़े के सिद्धांतों के खिलाफ की गई थी। उन्होंने कहा कि ममता कुलकर्णी को बिना संन्यास के सीधे इस पद का लाभ दिया गया, जो कि अखाड़ा की धार्मिक प्रक्रिया का उल्लंघन था।
वहीं, लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी, जो किन्नर समुदाय के एक प्रमुख नेता थे, के खिलाफ यह आरोप लगा कि उन्होंने 2019 के कुम्भ मेला में रिषि अजय दास की अनुमति के बिना जूना अखाड़ा के साथ एक समझौता किया था। इस समझौते के चलते अखाड़ा में बिना धार्मिक संस्कारों के लोग जुड़ने लगे, जो कि अखाड़े की परंपराओं के खिलाफ था। रिषि अजय दास ने इसे समाज और सनातन धर्म के खिलाफ बताया और त्रिपाठी को पद से हटा दिया।
रिषि अजय दास का बयान
रिषि अजय दास ने अपने बयान में कहा, “मैंने लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी को महामंडलेश्वर के पद से हटा दिया है, क्योंकि वे अपनी जिम्मेदारियों से भटक गए थे। उनका कार्य किन्नर समुदाय की उन्नति और धार्मिक प्रचार के उद्देश्य से नहीं था।” उन्होंने यह भी कहा कि ममता कुलकर्णी की नियुक्ति अखाड़े की परंपराओं का उल्लंघन करती है और यह समाज के लिए हानिकारक है।
अखाड़े की परंपराओं की रक्षा
रिषि अजय दास का यह कदम किन्नर अखाड़ा की धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए लिया गया है। किन्नर अखाड़ा भारतीय धार्मिक परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण संस्थान है, जो विशेष रूप से किन्नर समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके नेतृत्व का उद्देश्य धार्मिक प्रथाओं, आस्थाओं और संस्कारों को बनाए रखना है। रिषि अजय दास ने यह स्पष्ट किया कि अखाड़े की पवित्रता और उसकी धार्मिक आस्थाओं को कभी भी खतरे में नहीं डाला जा सकता।
समाज और धार्मिक क्षेत्र में संदेश
रिषि अजय दास के इस कदम से यह संदेश जाता है कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और परंपराओं का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। ममता कुलकर्णी और लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की बर्खास्तगी से यह भी स्पष्ट होता है कि किन्नर अखाड़ा किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेगा। अब देखना यह है कि इस फैसले के बाद किन्नर अखाड़ा और इसके समर्थकों की प्रतिक्रिया क्या होती है, और इसके भविष्य पर इसका क्या असर पड़ता है।
यह घटनाक्रम भारतीय धार्मिक परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसमें अखाड़े के सिद्धांतों और परंपराओं को बनाए रखने की ओर एक दृढ़ कदम बढ़ाया गया है।

