नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्य सभा सभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा बीजेपी पर किए गए काव्यात्मक तंज का मजेदार जवाब दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कवि गोपाल दास सक्सेना ‘नीरज’ की कविताओं का सहारा लिया, जिससे पूरा सदन हंसी से गूंज उठा।
प्रधानमंत्री मोदी ने धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा, “मैं देख रहा था कि खरगे जी को कविता सुनाने का बहुत शौक है और आप (सभापति) को भी यह बहुत अच्छा लगता है। तो मैंने सोचा, क्यों न मैं भी एक कविता सुनाऊं: ‘तमाशा करने वालों को क्या खबर, हमने कितने तूफानों को पार कर दिया जलाया है।'” यह पंक्तियाँ प्रसिद्ध कवि नीरज के काव्य संग्रह से ली गई थीं।
मोदी ने इस काव्य उद्धरण के माध्यम से कांग्रेस पर एक हल्का तंज कसते हुए कहा कि पार्टी इतनी मुश्किलों में फंसी हुई है कि खरगे जी को अपनी बात खुलकर कहने का साहस नहीं हो रहा है और वे अपनी भावनाओं को नीरज की कविताओं के जरिए व्यक्त कर रहे हैं।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नीरज की एक और प्रसिद्ध कविता का उल्लेख किया: “है बहुत अंधियारा, अब सूरज निकलना चाहिए, जिस तरह से भी हो, ये मौसम बदलना चाहिए।” मोदी ने यह पंक्तियाँ कांग्रेस को संबोधित करते हुए कही, जो 1970 के दशक में सत्ता में थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने नीरज की एक और कविता का जिक्र किया: “मेरे देश उदास न हो, फिर दीप जलेगा, तमिर ढलेगा।”
मोदी के इन काव्यात्मक उत्तरों ने राज्य सभा में हलचल मचाई और बीजेपी के सांसदों के बीच हंसी का माहौल बना दिया। मोदी ने न केवल खरगे के काव्यात्मक तंज का जवाब दिया, बल्कि अपने शब्दों से कांग्रेस को भी निशाना बनाया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह काव्यात्मक उत्तर कांग्रेस के लिए एक संदेश था, जिसमें उन्होंने नीरज की कविताओं का सही संदर्भ देते हुए अपनी बात रखी और राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की।

