नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने डॉ. अशोक सिद्धार्थ और पूर्व सांसद नितिन सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण निष्कासित कर दिया है। खास बात यह है कि अशोक सिद्धार्थ, बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं। इस फैसले को पार्टी में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
डॉ. अशोक सिद्धार्थ बसपा के दक्षिणी राज्यों के प्रभारी थे और संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। नितिन सिंह भी मेरठ जिले में बसपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे। बसपा प्रमुख मायावती ने बयान जारी कर बताया कि दोनों नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों और गुटबाजी में लिप्त पाया गया।
हालांकि, उन्हें पहले चेतावनी दी गई थी, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर काम करना जारी रखा। ऐसे में बसपा ने अनुशासन के आधार पर तत्काल प्रभाव से उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय लिया।
पारिवारिक संबंधों के बावजूद मायावती का सख्त रुख
यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अशोक सिद्धार्थ, मायावती के उत्तराधिकारी माने जा रहे आकाश आनंद के ससुर हैं। इसके बावजूद मायावती ने अपने फैसले में कोई नरमी नहीं दिखाई और स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी के अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से मायावती ने संकेत दिया है कि बसपा में गुटबाजी और अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
क्या पड़ेगा राजनीतिक असर?
अशोक सिद्धार्थ का निष्कासन बसपा की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर सकता है। वे पार्टी के वरिष्ठ दलित चेहरों में से एक थे, और दक्षिण भारत में पार्टी के विस्तार में उनकी भूमिका अहम थी। वहीं, आकाश आनंद के नेतृत्व में बसपा के नए भविष्य की चर्चा भी तेज हो गई है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का आकाश आनंद की राजनीति और बसपा के अंदरूनी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि अशोक सिद्धार्थ और नितिन सिंह भविष्य में किस राजनीतिक दिशा में कदम बढ़ाते हैं।

