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गाजीपुर में पत्रकार पर मुकदमा: सवाल उठाने पर हुई एफआईआर, प्रशासन पर उठे सवाल

गाजीपुर, यूपी – स्वतंत्र पत्रकारिता पर एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र में पत्रकार विवेक यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। विवेक यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि उनके पिता दयाशंकर यादव उर्फ मुन्ना यादव को कुछ दबंगों ने जबरन घर से उठा लिया और उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया।

विवेक यादव के अनुसार, जब उन्होंने इस घटना की शिकायत करनी चाही, तो प्रशासन ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी। उन्होंने कहा कि “प्रश्न पूछना अगर गुनाह है, तो फिर लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता का क्या महत्व रह जाता है?”

क्या है मामला?

एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 217, 352 और 351(3) के तहत दर्ज किया गया है। यह एफआईआर 11 फरवरी 2025 को शाम 6:17 बजे दर्ज की गई, जबकि घटना 10 फरवरी 2025 को सुबह 11 बजे की बताई गई है।

धाराओं की व्याख्या:

धारा 217: किसी सरकारी अधिकारी द्वारा कर्तव्य का उल्लंघन।

धारा 352: हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।

धारा 351(3): गंभीर धमकी से संबंधित अपराध।

एफआईआर में पंकज यादव, जितेंद्र यादव और विवेक यादव सहित तीन नाम शामिल हैं। इसमें विवेक यादव के पिता दयाशंकर यादव उर्फ मुन्ना यादव का भी नाम उल्लेखित है।

पत्रकारिता पर खतरा या कानूनी कार्रवाई?

यह मामला सिर्फ एक पत्रकार पर एफआईआर दर्ज होने का नहीं है, बल्कि यह प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में सवाल पूछने के अधिकार पर भी सीधा हमला है। पत्रकार संगठनों और सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

विवेक यादव का आरोप है कि पुलिस ने दबंगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय एक दिन पहले की तारीख में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। उन्होंने इसे प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला बताया।

क्या कह रहे हैं पत्रकार और संगठन?

पत्रकार संगठनों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि अगर पत्रकारों को सवाल पूछने पर मुकदमों में फंसाया जाएगा, तो निष्पक्ष पत्रकारिता संभव नहीं रह जाएगी।

राष्ट्रीय पत्रकार संघ और यूपी प्रेस क्लब जैसे संगठन इस मामले में निष्पक्ष जांच और विवेक यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

आगे की राह

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह मामला भी एक पत्रकार की आवाज दबाने के एक और उदाहरण के रूप में दर्ज हो जाएगा?

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है, और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। इसी बीच विवेक यादव की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है कि वो अपना अगला कदम क्या उठाएंगे ? क्या वह इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएंगे और न्याय पाने के लिए क्या कानूनी विकल्प अपनाएंगे।

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