इम्फाल: मणिपुर में पिछले 20 महीनों से जारी हिंसा और अस्थिरता के बाद आखिरकार राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से मणिपुर में शांति बहाल करने और राष्ट्रपति शासन की मांग कर रही थी, लेकिन यह निर्णय तब लिया गया जब हालात बेहद भयावह हो गए।
क्यों लिया गया राष्ट्रपति शासन का फैसला?
- मणिपुर में बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी और जातीय संघर्ष ने राज्य को झकझोर कर रख दिया था।
- 60 हजार से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और अब तक 300 से ज्यादा लोगों की हत्या की खबरें आ चुकी हैं।
- महिलाओं के साथ बर्बरता की घटनाएं सामने आईं, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
- गृहमंत्री अमित शाह की ओर से की गई शांति बहाली की कोशिशें नाकाम रहीं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश-विदेश की यात्राएं तो जारी रखीं, लेकिन मणिपुर की स्थिति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
भाजपा सरकार पर सवाल
राज्य में भाजपा की बहुमत वाली सरकार के बावजूद, हालात दिनों-दिन बिगड़ते गए। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार ने समय रहते स्थिति संभालने में नाकामी दिखाई, जिससे आम जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
मणिपुर की मौजूदा स्थिति
आज भी मणिपुर में शांति बहाली पूरी तरह से संभव नहीं हो पाई है। लोग डर और अनिश्चितता के साए में जीने को मजबूर हैं। राज्य में शांति की बहाली और जनता की सुरक्षा को लेकर अब सरकार की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

