लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गहमा-गहमी का माहौल है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर तीखा हमला करते हुए इसे योगी आदित्यनाथ सरकार का ‘दूसरा आखिरी बजट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बजट में राज्य के विकास के लिए कोई ठोस योजना या दिशा नहीं है, और यह भाजपा सरकार के चुनावी वादों से पूरी तरह से विपरीत है। अखिलेश यादव का यह बयान उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है, खासकर जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
बजट की आलोचना
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस बजट में आम जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। उनका कहना था कि यह बजट राज्य के गरीब और कमजोर वर्गों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार नहीं किया गया है। इसके बजाय, यह बजट केवल बड़े-बड़े दावों और दिखावे तक सीमित है। यादव ने कहा, “यह योगी आदित्यनाथ सरकार का नौवां बजट है और इसके बाद केवल एक और बजट होगा, जिसके बाद जनता को एक नया विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा।”
अखिलेश ने भाजपा के उन दावों को भी खारिज किया जिसमें हर बार बजट को ‘सबसे बड़ा बजट’ कहा जाता है। उनका कहना था कि यह कोई नई बात नहीं है क्योंकि हर बजट पिछले बजट से बड़ा होता है, लेकिन इसका असल असर जनता पर क्या होगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कभी यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिरकार आम जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट सिर्फ भाजपा के चुनावी घोषणाओं का हिस्सा हो सकता है, लेकिन राज्य की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट जैसे मुद्दों पर बजट में कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है।
चुनावी वादों से दूरी
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को भाजपा के चुनावी वादों से दूर बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों, युवाओं, और गरीबों के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। उनका कहना था, “यूपी सरकार का यह बजट केवल चुनावी दिखावा है। इसमें कुछ नया नहीं है, जो वास्तव में राज्य के विकास को दिशा दे सके।”
भले ही योगी सरकार ने इस बजट में कई योजनाओं और प्रावधानों की घोषणा की हो, लेकिन अखिलेश यादव का मानना है कि यह योजनाएं पूरी तरह से चुनावी लाभ के लिए बनाई गई हैं और इनका आम जनता की समस्याओं से कोई वास्तविक संबंध नहीं है।
भाजपा के ‘सबसे बड़े बजट’ के दावे पर कटाक्ष
अखिलेश यादव ने भाजपा के उन दावों को भी गंभीरता से लिया, जिसमें हर बार यह कहा जाता है कि यह बजट ‘सबसे बड़ा बजट’ है। उनका कहना था, “यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि हर बार बजट पिछले बजट से बड़ा ही होता है। लेकिन सवाल यह है कि इसका वास्तविक प्रभाव क्या है? क्या इससे उत्तर प्रदेश की जनता के जीवन स्तर में कोई सुधार हुआ है?”
अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा हर बार अपने बजट को सबसे बड़ा बताकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश करती है, लेकिन असल में बजट के जरिए राज्य की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में बेरोजगारी और किसानों के संकट जैसी समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं, लेकिन इस बजट में इन मुद्दों को ठीक से संबोधित नहीं किया गया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई ठोस कदम नहीं
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए प्रावधानों को भी नकारात्मक रूप से देखा। उनका कहना था कि इस बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के हालात पर सवाल उठाए और कहा कि भाजपा सरकार ने इन क्षेत्रों में सुधार करने के बजाय सिर्फ बड़े-बड़े दावे किए हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य में सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति बेहद खराब है, और बजट में इस सुधार के लिए कोई उल्लेखनीय योजना नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने जब सरकार में थे, तब इन क्षेत्रों में सुधार के लिए कई योजनाएं बनाई थीं, लेकिन इस सरकार ने उन योजनाओं को नजरअंदाज कर दिया है।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजेंगे कुंभ मेला अध्ययन की किताब
अखिलेश यादव ने इस मौके पर एक दिलचस्प बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए कुंभ मेला अध्ययन की एक किताब भेजेंगे। यह अध्ययन कुंभ मेला के महत्व और उसकी सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है। अखिलेश यादव ने बताया कि उन्होंने पहले इस अध्ययन का अंग्रेजी संस्करण मुख्यमंत्री को भेजा था, और अब इसका हिंदी संस्करण भेजने की योजना है, ताकि मुख्यमंत्री इसे आसानी से पढ़ सकें।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि यह अध्ययन न केवल यूपी के सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करता है, बल्कि राज्य के विकास के लिए नए दृष्टिकोण की जरूरत को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन यह बताता है कि कैसे बड़े आयोजनों को सही तरीके से प्रबंधित करके राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सकता है।
अखिलेश यादव की इस आलोचना के बाद अब भाजपा और योगी सरकार के सामने यह सवाल उठता है कि क्या वे आगामी चुनावों के लिए इस बजट को एक सकारात्मक संदेश के रूप में पेश कर पाएंगे, या फिर यह बजट केवल एक चुनावी हथकंडा साबित होगा। राज्य के विकास के लिए आवश्यक ठोस योजनाओं की कमी इस बजट में साफ नजर आती है, और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि योगी सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए आगे कौन से कदम उठाती है।
उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में होने वाला है, और इस समय सरकार के बजट को लेकर विपक्ष का आलोचनात्मक रुख आगामी चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है। अखिलेश यादव का यह बयान केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए एक सशक्त विकल्प प्रस्तुत करने की उनकी कोशिश का हिस्सा है।

