गाजीपुर, मार्च 2025 – एक चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, शराब तस्करों ने बिहार में शराब की तस्करी करने का नया और सुरक्षित तरीका ढूंढ निकाला है—वह है एक्सप्रेस ट्रेनों की एयर कंडीशन (एसी) बोगियों के माध्यम से। जहां पुलिस ने हाईवे पर अपनी पैनी नजर रखी है और नदियों में तस्करी एक चुनौती बन गई है, वहीं तस्करों ने रात के अंधेरे में ट्रेनों का सहारा लिया है और अवैध शराब की बड़ी खेप बिहार पहुंचाने लगे हैं।
दिनदयाल उपाध्याय जंक्शन (पीडीडीयू जंक्शन) , अब इस अवैध गतिविधि का प्रमुख केंद्र बन गया है, जहां ट्रेनें शराब तस्करी का गुप्त मार्ग बन गई हैं। यह तथ्य सामने आया है कि एसी बोगियों में केवल आरक्षित सीटों के यात्रियों के लिए ही यात्रा करना संभव होता है, लेकिन तस्कर इस व्यवस्था का फायदा उठा रहे हैं और इन बोगियों में शराब को ट्रॉली बैग और प्लास्टिक की बोरियों में छिपाकर भेज रहे हैं। यह बोरियां अक्सर आरक्षित बोगियों में रखी जाती हैं, जो सामान्यतः कड़ी निगरानी में होती हैं।
बीते दो दिनों में ही, अधिकारियों ने इन ट्रेनों से ₹5 लाख से अधिक मूल्य की विदेशी शराब बरामद की है, जो इस तस्करी के ऑपरेशन के पैमाने को दर्शाता है। खास बात यह है कि यह शराब तस्करी विशेष रूप से तब बढ़ी है, जब बिहार में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद तस्करी की गतिविधियों में अचानक वृद्धि हो गई है। पुलिस ने सड़कों और नदियों पर निगरानी बढ़ाई, तो तस्करों ने रेल नेटवर्क का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
यह केवल ट्रेनों की एसी बोगियों का ही मामला नहीं है, बल्कि तस्कर इन बोगियों को इस तरह से उपयोग कर रहे हैं कि सुरक्षा जांच और निगरानी को धोखा दिया जा सके। आरक्षित सीटों वाले यात्रियों की जांच आमतौर पर नियमित होती है, लेकिन तस्कर इन प्रक्रियाओं को चकमा देकर शराब को ट्रॉली बैग, बोरियों और अन्य वस्तुओं में छिपाकर ले जाते हैं।
इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्रेन यात्रा के निगरानी और प्रवर्तन में गंभीर कमी है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या तस्करी में अंदरूनी सांठगांठ भी हो सकती है, खासकर जब इतनी आसानी से शराब तस्करी की जा रही हो।
यह नई तस्करी की विधि उन पहले की घटनाओं के बाद आई है, जब पिछले साल शराब तस्करों ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के दो जवानों की हत्या कर दी थी। इस हिंसक घटना के बाद पुलिस ने तस्करी पर कड़ी कार्रवाई की थी, लेकिन जैसे ही पुलिस ने दबाव कम किया, तस्कर फिर से ट्रेनों के माध्यम से शराब की तस्करी करने लगे हैं।
गाजीपुर क्षेत्र में शराब तस्करी की यह वृद्धि स्थानीय अधिकारियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि गाजीपुर कई स्थानों पर बिहार से जुड़ा हुआ है। स्थानीय पुलिस पर अब इस नई तस्करी के रास्ते पर कड़ी नजर रखने और इसे बढ़ने से रोकने का भारी दबाव है।
स्थानीय अधिकारियों ने इस समस्या से निपटने के लिए महत्वपूर्ण ट्रेन मार्गों पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन तस्करों द्वारा एसी बोगियों का उपयोग करने की चतुराई यह दिखाती है कि सिस्टम में कई खामियां हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है। रेलवे पुलिस, स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता हो सकती है ताकि इस बढ़ती तस्करी को रोका जा सके और ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह स्पष्ट हो रहा है कि शराब तस्करी का यह नया तरीका अपराधियों की रचनात्मकता का परिचायक है, और साथ ही भारत के परिवहन सुरक्षा ढांचे में महत्वपूर्ण कमजोरियों को भी उजागर कर रहा है। कड़ी निगरानी, बेहतर स्क्रीनिंग और अधिक सक्रिय प्रवर्तन की आवश्यकता को नकारा नहीं किया जा सकता है, खासकर इस बढ़ती हुई तस्करी के बीच।
गाजीपुर की इस नई तस्करी की कहानी यह याद दिलाती है कि आपराधिक नेटवर्क लगातार विकसित हो रहे हैं, जो कानूनी प्रणालियों को धोखा देने और न्याय से बचने के नए-नए तरीके ढूंढ़ते रहते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिरकार कब तक अधिकारी इस नई तस्करी की विधि को रोकने में सक्षम होंगे? अब यह समय की दौड़ बन गई है कि इस ऑपरेशन को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए।

