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पाकिस्तानी रेंजर्स की हिरासत में रहे BSF जवान पुर्नम कुमार शॉ की वतन वापसी, अटारी-वाघा बॉर्डर पर भारत को सौंपा गया

अमृतसर, 14 मई 2025 – सीमा सुरक्षा बल (BSF) के कांस्टेबल पुर्नम कुमार शॉ, जो 23 अप्रैल से पाकिस्तानी रेंजर्स की हिरासत में थे, को आज सुबह 10:30 बजे अटारी-वाघा बॉर्डर पर भारत को सुरक्षित सौंप दिया गया। यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच तय प्रोटोकॉल के तहत संपन्न हुई।

पुर्नम कुमार शॉ की रिहाई को लेकर सीमा सुरक्षा बल और भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे थे। बीएसएफ के अनुसार, जवान को वापस लाने की प्रक्रिया को शांति और संयम से निभाया गया, जिसमें दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग रहा।

क्या था मामला?
सूत्रों के अनुसार, कांस्टेबल पुर्नम कुमार शॉ 23 अप्रैल को सीमा पर तैनाती के दौरान गलती से सीमा पार कर पाकिस्तानी क्षेत्र में चले गए थे, जिसके बाद उन्हें पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया था। भारतीय अधिकारियों ने तभी से उनकी वापसी के लिए बातचीत शुरू कर दी थी।

प्रोटोकॉल के तहत वापसी
बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद आज सुबह अटारी-वाघा बॉर्डर पर जवान को सौंपा गया। बीएसएफ अधिकारियों ने पुष्टि की कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों और मानवता के आधार पर की गई। जवान की वापसी के समय भारतीय अधिकारियों की एक टीम मौके पर मौजूद थी।

जवान से हो रही है डीब्रीफिंग
बीएसएफ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि कांस्टेबल पुर्नम कुमार शॉ से फिलहाल डीब्रीफिंग की जा रही है। इस प्रक्रिया में यह जाना जाएगा कि वे किन परिस्थितियों में सीमा पार कर गए थे और पाकिस्तानी हिरासत में उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया। इसके अलावा उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति का भी गहन मूल्यांकन किया जा रहा है।

मानवाधिकार संगठनों और परिजनों ने जताई राहत
जवान की सुरक्षित वापसी से उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। पुर्नम कुमार के परिवार वालों ने केंद्र सरकार और बीएसएफ का आभार व्यक्त किया है। साथ ही मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मामले को लेकर सजगता और संवेदनशीलता बरतने की अपील की थी।

बीएसएफ का बयान
बीएसएफ की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, “हम अपने जवान की सुरक्षित वापसी से संतुष्ट हैं। यह घटना हमें सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के लिए सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता का भी एहसास कराती है।”

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सरहद पर तैनात जवान किस प्रकार कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं, और उनकी सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। कांस्टेबल पुर्नम कुमार शॉ की रिहाई भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संवाद की सफलता का एक सकारात्मक उदाहरण है।

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