पटना, बिहार | विशेष संवाददाता
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में एक बार फिर पारिवारिक कलह सामने आ गई है। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और छोटे बेटे तेजस्वी यादव के बीच चल रहे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। तेज प्रताप की निजी जिंदगी और प्रेम कहानी को लेकर उठे विवादों के बीच अब उनके मामा सुभाष यादव ने खुलकर बयान दिया है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
सुभाष यादव, जो लालू यादव के साले और तेज प्रताप के मामा हैं, ने कहा है कि तेज प्रताप को अब सामने आकर अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तेज प्रताप की बात सही है, तो पूरा परिवार उनके साथ खड़ा होगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच रिश्तों की दरार साफ तौर पर दिखाई दे रही है।
तेजस्वी पर गंभीर आरोप
सुभाष यादव ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव ही चाहते थे कि तेज प्रताप सियासत से किनारे हो जाएं। उनका कहना था कि तेजस्वी यह रणनीति बना रहे थे ताकि राजद में पूरी ताकत और नियंत्रण उन्हीं के पास रहे। उन्होंने कहा, “तेजस्वी ही चाहते थे कि तेज प्रताप पूरी तरह से साइड हो जाएं ताकि लालू जी का सबकुछ हमको मिल जाए।”
यह बयान राजनीतिक हलकों में इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक परिवार के सदस्य आपसी विवाद पर खुलकर कुछ नहीं कह रहे थे। लेकिन मामा सुभाष यादव का यह सीधा आरोप तेजस्वी पर बड़ा सियासी तूफान ला सकता है।
“तेज प्रताप को सामने आना चाहिए”
सुभाष यादव ने यह भी कहा कि तेज प्रताप को अब चुप नहीं रहना चाहिए। चाहे वह शादी से जुड़ा मुद्दा हो या राजनीतिक विवाद, उन्हें मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर तेज प्रताप अपनी बात साबित कर देते हैं, तो पूरा परिवार और वे स्वयं भी उनका साथ देंगे।
राजद में अंदरूनी कलह और नेतृत्व संघर्ष
राजद के भीतर यह संघर्ष सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि नेतृत्व को लेकर भी है। तेजस्वी यादव को लालू यादव का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है, जबकि तेज प्रताप की छवि पार्टी में अलग-थलग पड़ी दिखती है। ऐसे में अब मामा सुभाष यादव का बयान इस अंदरूनी खींचतान को और हवा दे सकता है।
तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच जारी खींचतान अब सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं रह गई है, बल्कि यह राजद के भविष्य और नेतृत्व को लेकर एक गंभीर सियासी मसला बन चुकी है। सुभाष यादव के आरोपों ने इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है और अब देखना होगा कि लालू यादव इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं।

