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भिवानी शिक्षिका हत्याकांड: लापरवाही पर पुलिसकर्मी निलंबित, परिजनों का इंसाफ की लड़ाई जारी

भिवानी, हरियाणा।
भिवानी जिले के लोहारू में शिक्षिका मनीषा की निर्मम हत्या ने पूरे हरियाणा को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ एक जघन्य हत्या का नहीं, बल्कि पुलिस की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का भी आईना है।

कैसे हुआ घटनाक्रम

ढाणी लक्ष्मण निवासी मनीषा 11 अगस्त को सिंघानी स्थित एक प्ले स्कूल गई थीं। देर रात तक घर न लौटने पर परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना डायल 112 की ईआरवी टीम को दी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मदद के बजाय अभद्र टिप्पणी की और गंभीरता से मामला नहीं लिया।

परिजन जब थाने पहुंचे तो वहां भी उन्हें धक्के दिए गए और मनीषा पर ही सवाल खड़े किए गए। अगले दिन खानापूर्ति करते हुए गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई।

13 अगस्त को नहर किनारे मनीषा का शव मिला। उसके कपड़े फटे थे, चेहरा तेजाब से जला हुआ था और गला तेजधार हथियार से रेतने की पुष्टि हुई। शव की हालत देख परिजनों ने दुष्कर्म की आशंका जताई।

परिजनों का आरोप और आक्रोश

परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो मनीषा की जान बच सकती थी। गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे पर जाम लगाया। कई जगह बाजार बंद रहे और गांवों में कैंडल मार्च निकाला गया।

पुलिस और सरकार की कार्रवाई

  • मुख्यमंत्री नायब सैनी ने घटना का संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से भिवानी के एसपी मनबीर सिंह का तबादला कर दिया।
  • महिला एएसआई शकुंतला, ईआरवी टीम के ईएसआई अनूप, कांस्टेबल पवन और एसपीओ धर्मेंद्र को निलंबित किया गया।
  • लोहारू थाने के प्रभारी अशोक कुमार को लाइन हाजिर कर दिया गया।
  • 2024 बैच के आईपीएस सुमित कुमार को नया एसपी नियुक्त किया गया।

रोहतक रेंज के आईजी वाई पूर्ण कुमार ने कहा कि मामले की जांच के लिए छह टीमें गठित की गई हैं। साथ ही लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच को समय दें।

दो बार हुआ पोस्टमार्टम

पहले पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो सकी। शव की खराब स्थिति को देखते हुए रोहतक पीजीआई में दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। इसमें भी दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, यह साफ हो गया कि मनीषा की हत्या तेजधार हथियार से गला रेतकर की गई थी।

परिजनों की चेतावनी

परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है और कहा कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, वे आंदोलन जारी रखेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि 48 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।

बड़ा सवाल – लापरवाही या सिस्टम की विफलता?

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि जब परिजनों ने 11 अगस्त की रात ही पुलिस को सूचना दी थी, तब क्यों तत्काल कार्रवाई नहीं हुई? क्यों गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने में देरी की गई? क्यों परिवार की शिकायतों को अनसुना किया गया?

हरियाणा सरकार ने भले ही ताबड़तोड़ कार्रवाई कर अधिकारियों को लाइन हाजिर कर दिया है, लेकिन असली सवाल है – क्या मनीषा को समय पर कार्रवाई से बचाया जा सकता था?

भिवानी शिक्षिका हत्याकांड अब सिर्फ एक क्राइम केस नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बन गया है। परिजनों का संघर्ष जारी है और पूरा इलाका इंसाफ की मांग कर रहा है। अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच कितनी पारदर्शी होती है और क्या आरोपियों को जल्द सजा मिलती है।

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