THE KN NEWS | गाज़ीपुर ब्रेकिंग न्यूज़
दिनांक: 23 अगस्त 2025 |
गाज़ीपुर ज़िले के जखनिया सीएचसी में निरीक्षण के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सुभासपा विधायक बेदी राम पर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल की खामियों की आड़ में सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र यादव को सिर्फ़ उनके यादव टाइटल की वजह से अपमानित किया और अपने समर्थकों के साथ मिलकर उन्हें धमकाया।
निरीक्षण बना अपमान का मंच
विधायक बेदी राम जखनिया सीएचसी के औचक निरीक्षण पर पहुंचे थे। मरीजों और तीमारदारों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें कीं। इसके बाद विधायक ने निरीक्षण शुरू किया। निरीक्षण के दौरान खामियां मिलने पर उन्होंने संयम खो दिया और डॉ. योगेंद्र यादव पर चिल्लाने लगे।
बताया जा रहा है कि विधायक ने बार-बार डॉ. यादव को अपमानित किया और खरी-खोटी सुनाई। उनके समर्थकों ने भी माहौल को बिगाड़ते हुए बदतमीज़ी की।
यादव टाइटल बना निशाना
लोगों का कहना है कि विधायक की नाराज़गी का असली कारण अस्पताल की व्यवस्था नहीं, बल्कि डॉक्टर का यादव टाइटल था।
👉 विधायक पर आरोप है कि उन्होंने जातीय मानसिकता से ग्रस्त होकर डॉ. योगेंद्र यादव को निशाना बनाया।
👉 यही वजह है कि बार-बार व्यक्तिगत अपमान और धमकी दी गई।
इस घटना ने यादव समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि यह केवल डॉक्टर का नहीं, बल्कि पूरे समाज का अपमान है।
समाजवादी पार्टी के इशारे का आरोप
विधायक बेदी राम ने डॉ के खिलाफ़ यह भी आरोप लगाया कि वह समाजवादी पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं।
👉 जानकारों का कहना है कि यादव समाज और डॉक्टरों की छवि को खराब करने के लिए विधायक ने यह सब जानबूझकर किया।
👉 विपक्षी राजनीति को ध्यान में रखकर डॉक्टर को टारगेट करना और यादव टाइटल को मुद्दा बनाना किसी राजनीतिक रणनीति से कम नहीं है।
डॉक्टर का जवाब – “बहुत विधायक देखे हैं”
लगातार अपमानित होने के बाद डॉ. योगेंद्र यादव ने हाथ जोड़कर विधायक से कहा कि सम्मान से बात कीजिए। गुस्से में उन्होंने कहा –
“बहुत विधायक देखे हैं, मैं इस्तीफ़ा भेज दूँगा।”
इसके बाद डॉक्टर ने अपनी कुर्सी छोड़ी और चैंबर से बाहर चले गए। इस बयान के बाद माहौल और गर्मा गया।
जनता और समाज में गुस्सा
👉 मरीजों और स्थानीय लोगों ने विधायक की इस हरकत को “बेलगाम गुंडई” करार दिया।
👉 सोशल मीडिया पर भी विधायक बेदी राम की आलोचना हो रही है।
👉 यादव समाज के संगठनों ने कहा है कि डॉक्टर को यादव होने की वजह से अपमानित करना जातीय राजनीति की चरम सीमा है।
सवाल
- क्या विधायक का काम अस्पताल की खामियों को सुधारना है या डॉक्टर को जाति के आधार पर अपमानित करना?
- क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी गुंडई और दबाव बनाना है?
- क्या समाजवादी पार्टी को बदनाम करने के लिए विधायक ने यह पूरा खेल रचा |
नतीजा
जखनिया सीएचसी का यह मामला अब केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का मुद्दा नहीं रहा। यह अब जातीय राजनीति, गुंडई और विपक्षी इशारों पर चलने का बड़ा सवाल बन गया है।
👉 एक ओर डॉक्टर सम्मान की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विधायक पर बेलगाम गुंडई और जातिवादी मानसिकता का आरोप है।
👉 जनता पूछ रही है – “क्या यही है जनप्रतिनिधि की असली तस्वीर?”

