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“महाकुंभ में फोटो की मांग पर…: सीएम योगी के ‘विवादित’ सहयोगी और 2027 यूपी चुनाव की तैयारी”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में कई ऐसे सहयोगी हैं, जो अपनी विवादित बयानबाजी और विवादों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। इनमें प्रमुख नाम ओम प्रकाश राजभर का है, जो सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष हैं। ओम प्रकाश राजभर ने राजनीति में कई अहम गठबंधन किए हैं, जिनमें मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP), अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (SP), और भारतीय जनता पार्टी (BJP) शामिल हैं। हर गठबंधन के दौरान उनका बयानों और रवैये को लेकर विवाद हुआ है। इस बार वे योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, लेकिन उनके बयानों और विवादों के बीच यह सवाल उठता है कि क्या उनका गठबंधन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ कायम रहेगा?

ओम प्रकाश राजभर का ताजा विवाद

महाकुंभ 2025 के दौरान एक और विवाद सामने आया जब ओम प्रकाश राजभर को मंत्रियों के लिए तैयार किए गए वाहनों में बैठने का स्थान नहीं मिला। कहा जाता है कि राजभर ने खुद को एक वाहन में न बैठने का आरोप लगाया, क्योंकि “गैरमहत्वपूर्ण लोग” उन वाहनों में बैठने लगे थे। इस घटना के बाद राजभर ने वाहन को रोक दिया और विरोध जताया। बाद में, पुलिस अधिकारी और कुछ अन्य मंत्रियों ने उन्हें अन्य वाहन में बैठने का इंतजाम किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और यह विवाद और भी तूल पकड़ गया।

सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान

जब नेटवर्क18 के समूह संपादक राहुल जोशी ने सीएम योगी आदित्यनाथ से पूछा कि उनके लिए उनके सहयोगी कितने महत्वपूर्ण हैं, तो योगी ने कहा, “सभी राज्य कैबिनेट का हिस्सा हैं, और सभी मिलकर फैसले लेते हैं। सभी मंत्री यहां महाकुंभ में भी आए थे, और जब हमें बताया गया कि कैबिनेट का एक चित्र खींचा जाएगा, तो हमने कहा कि हमारे सभी गठबंधन दलों के नेता भी इस चित्र में शामिल होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “सभी एक साथ हैं और भविष्य में भी एक साथ रहेंगे।”

बीजेपी के उत्तर प्रदेश गठबंधन के साथी

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के गठबंधन दलों में अपना दल (सोनेलाल), राष्ट्रीय लोक दल (RLD), निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) शामिल हैं। इनमें से एसबीएसपी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को सबसे ज्यादा विवादों का सामना करना पड़ा है। राजभर ने एक बार कहा था कि वे “सीएम योगी के बाद राज्य में दूसरे सबसे ताकतवर व्यक्ति हैं।” इसके अलावा, 2022 में उन्होंने अपने गठबंधन को तोड़ते हुए समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाया था। इस दौरान, राजभर ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें “मारने के लिए गुंडे भेजे थे।”

ओम प्रकाश राजभर का महत्व और 2027 चुनाव

हालांकि ओम प्रकाश राजभर का राजनीतिक इतिहास विवादों से भरा हुआ है, लेकिन उनका सामुदायिक महत्व उनके राजनीतिक वजन को बढ़ाता है। राजभर जाति उत्तर प्रदेश में कुछ पूर्वी जिलों जैसे मऊ, बलिया, वाराणसी, आजमगढ़, जौनपुर, देवरिया, गाजीपुर और अंबेडकरनगर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे उनका वोट बैंक यूपी चुनावों में अहम साबित हो सकता है। राजभर समुदाय का वोट प्रतिशत भले ही राज्यभर में दो प्रतिशत से कम हो, लेकिन इन जिलों में उनकी अहमियत अधिक है, जिस वजह से बीजेपी इन चुनावों में जातीय समीकरणों को लेकर सतर्क है।

सीएम योगी का बयान: 2027 चुनाव के लिए तैयारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2027 के विधानसभा चुनावों पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य बहुत स्पष्ट है। विरासत, विकास, गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और लोगों में सुरक्षा का अहसास कराना हमारे प्रमुख मुद्दे हैं। हम ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ 2027 के चुनावों में बढ़ेंगे और उत्तर प्रदेश में फिर से पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे।”

योगी ने यह भी कहा, “सरकार प्रत्येक गांव, गरीब, किसान, युवा और महिला के हितों को प्राथमिकता देते हुए अपने काम को आगे बढ़ा रही है।”

ओम प्रकाश राजभर का विवादों से भरा इतिहास, उनके तीखे बयान और उनका राजनीतिक महत्व सभी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में उनका गठबंधन बीजेपी के साथ बना रहेगा या नहीं। हालांकि, बीजेपी राज्य में जातीय समीकरणों को लेकर सावधान है, और ओम प्रकाश राजभर का समुदाय यूपी के कुछ महत्वपूर्ण इलाकों में प्रभावी है, जिससे उनका राजनीतिक अस्तित्व और गठबंधन महत्वपूर्ण बने रहते हैं। योगी आदित्यनाथ की सरकार के लिए 2027 का चुनाव केवल विकास पर नहीं, बल्कि इन गठबंधनों की स्थिरता पर भी निर्भर करेगा।

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