प्रयागराज | महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अवसर पर एक और भगदड़ की घटना सामने आई है, जिससे श्रद्धालुओं में भय और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। इस हादसे में कई लोग घायल हो गए, जबकि कुछ श्रद्धालु लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन की निष्क्रियता और घटनास्थल से मलबा हटाने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे पीड़ित परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
हादसे की चश्मदीदों की गवाही
हादसे की प्रत्यक्षदर्शी तान्या ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “मैंने अफसरों से कहा कि लोग मर रहे हैं, उन्हें बचाइए। लेकिन मेरी बात सुनी ही नहीं गई। अब सब मेरे खिलाफ हो गए हैं।”
वहीं, एक महिला पुलिसकर्मी ने भी हालात की भयावहता को स्वीकार करते हुए कहा, “सर, कंडीशन बिगड़ रही है, लेकिन कुछ बातें कैमरे पर नहीं बता सकती।”
पीड़ित परिवारों का कहना है कि हादसे के बाद भी प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। लापता लोगों की तलाश में परिजन भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सही जानकारी नहीं मिल रही।
प्रशासन की उदासीनता
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस गंभीर घटना को नकारने की कोशिश की। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद और डीआईजी विजय ढुल ने इसे सामान्य स्थिति बताया, जबकि चश्मदीदों और पीड़ित परिवारों के बयान कुछ और ही बयां कर रहे हैं।
नाराज श्रद्धालु और लाचार परिजन
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने घटनास्थल से मलबा हटाने के लिए ट्रॉलियों का इस्तेमाल किया, ताकि भगदड़ के साक्ष्य मिटाए जा सकें। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर राहत कार्य किया जाता, तो कई लोगों की जान बच सकती थी।
भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को 1.82 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया, जिससे मेले में भारी भीड़ उमड़ी। रविवार को राष्ट्रपति समेत 73 देशों के प्रतिनिधियों के आने की संभावना है, जिससे भीड़ और बढ़ने वाली है। ऐसे में प्रशासन की तैयारियों को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
क्या कार्रवाई होगी?
इस हादसे के बाद प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। जनता और परिजन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन घटनाओं से सबक लेकर आगे कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर श्रद्धालुओं की सुरक्षा इसी तरह जोखिम में बनी रहेगी?

