प्रयागराज: महाकुंभ मेले में हुई भयावह भगदड़ के बाद पूरा देश शोक में डूबा हुआ है। इस हादसे में सैकड़ों श्रद्धालु घायल हुए और कई लोगों की जान चली गई। लेकिन इस दुखद घटना के बीच बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री का एक विवादित बयान सामने आया है, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया है। उन्होंने कहा कि “लोग मरे नहीं हैं, बल्कि उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ है।”
क्या है महाकुंभ भगदड़ का मामला?
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। प्रशासन के मुताबिक, भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई, जिससे कई लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद राहत कार्य तेज कर दिया गया, लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर जनता का आक्रोश
भगदड़ में अपनों को खो चुके परिवारों के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि धीरेंद्र शास्त्री के बयान ने आग में घी डालने का काम किया। सोशल मीडिया पर लोग इस बयान की कड़ी निंदा कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया:
एक यूजर ने लिखा, “अगर यह मोक्ष है, तो क्या आपके परिवार के लिए भी ऐसा ही चाहेंगे?”
दूसरे ने कहा, “ऐसे बाबा समाज के लिए खतरा हैं। इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
BanDhirendraShastri और #ArrestFakeBaba जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
फर्जी बाबाओं पर उठते सवाल
यह कोई पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वह चमत्कार और अंधविश्वास फैलाने को लेकर चर्चा में रहे हैं। कई बार उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन उनके अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
बयान के बाद कई संगठनों और लोगों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर आम जनता को गुमराह करने वाले ऐसे लोगों पर रोक लगनी चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान असंवेदनशील और अमानवीय है। महाकुंभ में हुए हादसे ने कई परिवारों को तोड़ दिया, लेकिन ऐसे फर्जी बाबाओं को केवल अपनी लोकप्रियता और अंधभक्ति की चिंता है। समाज को चाहिए कि धार्मिक आस्था और अंधविश्वास के बीच फर्क समझे और ऐसे ढोंगी बाबाओं से सावधान रहे।

