भारत में विपक्षी दलों ने हाल ही में अमेरिका द्वारा 104 भारतीय नागरिकों के निर्वासन को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। ये नागरिक अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे थे और उन्हें एक अमेरिकी सैन्य विमान से अमृतसर भेजा गया। निर्वासन के दौरान इन नागरिकों का कहना था कि यात्रा के दौरान उनके हाथ और पैर हथकड़ी में बंधे थे और उन्हें केवल एयरपोर्ट पर पहुंचने पर ही रिहा किया गया।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने संसद में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किए, खासकर उस दावे पर कि मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच अच्छे रिश्ते हैं। उन्होंने पूछा, “अगर मोदी जी और ट्रम्प जी अच्छे दोस्त थे, तो प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई की?”
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने यह सवाल उठाया कि क्या भारत को अपने नागरिकों की गरिमा को बचाने के लिए अमेरिका से बातचीत नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा, “क्या यह एक सभ्य तरीके से निर्वासन करने का तरीका है, जब हमारे नागरिकों को हथकड़ी में बांधकर भेजा गया?”
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका का यह अधिकार हो सकता है कि वह अवैध आप्रवासियों को निर्वासित करे, लेकिन यह एक सैन्य विमान द्वारा किया जाना उचित नहीं था। उन्होंने सुझाव दिया कि एक सिविल विमान का उपयोग किया जा सकता था, जो इन नागरिकों को सम्मान के साथ वापस लाता।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, और अखिलेश यादव ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर चुप है और मोदी जी की व्यक्तिगत छवि को ज्यादा महत्व दे रही है, जबकि भारतीय नागरिकों की गरिमा की कोई कद्र नहीं की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें। उन्होंने कहा कि यह एक नीतिगत निर्णय था और सरकार इस पर उचित समय पर अपनी प्रतिक्रिया देगी।
इस मामले पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी सीमा सुरक्षा वीडियो में यह सत्यापित किया गया था कि निर्वासित नागरिकों की स्थिति सामान्य थी और उनके हाथ और पैर जबरदस्ती बंद नहीं किए गए थे। फिर भी, विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और यह मामला संसद में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सभी पक्षों का कहना है कि यह घटना भारतीय नागरिकों की गरिमा के खिलाफ है, और सरकार से जवाबदेही की मांग की जा रही है।

