दिल्ली : दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा हुए एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है। आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने भाजपा पर सरकार गठन में देरी को लेकर हमला बोला है और दावा किया है कि भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार हैं।
संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार
भा.ज.पा. के कई विधायक जैसे कि परवेश साहिब सिंह वर्मा, आशीष सूद, पवन शर्मा, विजयेंद्र गुप्ता, सतिश उपाध्याय, रेखा गुप्ता और शिखा रॉय मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों के रूप में चर्चा में हैं। हालांकि, भाजपा अपनी परंपरा के अनुसार चुनावी विश्लेषकों को चौंकाने में माहिर है, इसलिए ये नाम केवल अटकलें ही मानी जा रही हैं।
AAP का हमला
आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री अतिशी ने आरोप लगाया कि भाजपा के विधायक मंत्रिमंडल के पदों को लेकर आपस में झगड़ रहे हैं और अंततः दिल्ली सरकार को उनके चुनावी वादों को पूरा न कर पाने के लिए दोषी ठहराएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के पास उन वादों को पूरा करने का कोई इरादा नहीं है, जो उन्होंने चुनाव के दौरान जनता से किए थे।
भा.ज.पा. का परिपेक्ष्य
भा.ज.पा. ने दिल्ली विधानसभा में 48 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत हासिल की है, जिससे वह 27 वर्षों बाद दिल्ली में सत्ता में लौटी है। हालांकि, पिछले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख AAP नेता अपने-अपने गढ़ों में हार गए हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अतिशी ने अपनी सीट बरकरार रखी है। दिल्ली में 1993 से 1998 तक भाजपा की सरकार रही थी।
सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता का ध्यान रखते हुए मंत्रिमंडल गठन
भा.ज.पा. के नेताओं के अनुसार, आगामी मंत्रिमंडल में दिल्ली की विविध सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। पंजाबी, बानीया, पूर्वांचली समुदायों के साथ-साथ महिलाओं, अनुसूचित जाति, ओबीसी और ब्राह्मण समुदायों के भी प्रतिनिधित्व की उम्मीद है।
भा.ज.पा. ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पार्टी के सक्रिय विधायक से होगा, न कि किसी सांसद से। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने हाल ही में भाजपा में शामिल हुए कुछ नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान देने का विचार भी पूरी तरह से बंद नहीं किया है।
दिल्ली की नई सरकार गठन में हो रही देरी और भाजपा के भीतर चल रहे मंथन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा किसे मुख्यमंत्री पद के लिए चुनती है और क्या पार्टी अपने चुनावी वादों को पूरा करने में सफल हो पाएगी।

