लेखक: द KN NEWS डेस्क | प्रकाशित: 17 मई 2025
वर्तमान युग में जहां पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है, दिल्ली सरकार ने एक साहसिक और दूरदर्शी कदम उठाते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति को संशोधित करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए सरकार ने 10 विशेषज्ञों की एक समिति गठित की है, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था की रूपरेखा को पूरी तरह बदल सकती है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि नई ईवी नीति क्यों जरूरी है, समिति का गठन कैसे हुआ, उसका कार्य क्या होगा और इससे दिल्ली के नागरिकों, पर्यावरण तथा अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
ईवी नीति की आवश्यकता क्यों?
दिल्ली देश का सबसे प्रदूषित महानगरों में से एक है। यहाँ हर साल वायु प्रदूषण के कारण लाखों लोग बीमार पड़ते हैं और हजारों की जान चली जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्टों में यह कई बार सामने आया है कि दिल्ली में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे हानिकारक कण मानकों से कई गुना अधिक होते हैं।
इसका प्रमुख कारण पारंपरिक ईंधनों से चलने वाले वाहन हैं, जिनमें पेट्रोल, डीजल और सीएनजी शामिल हैं। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं वायुमंडल को विषैला बनाता है और साथ ही साथ हर साल करोड़ों लीटर ईंधन का आयात कर देश पर आर्थिक बोझ भी डालता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए अगस्त 2020 में दिल्ली सरकार ने एक महत्वाकांक्षी ईवी नीति लागू की थी, जिसका लक्ष्य था कि 2024 तक राजधानी में 25% वाहन इलेक्ट्रिक हो जाएं। हालांकि यह नीति अगस्त 2023 में समाप्त हो गई, लेकिन उसकी सफलता और अधूरी संभावनाओं को देखते हुए इसे संशोधित रूप में फिर से लागू करने की योजना बनाई गई है।
नई समिति का गठन: कौन हैं सदस्य?
दिल्ली सरकार ने EV नीति के नए मसौदे को तैयार करने के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाई है। यह समिति विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से मिलकर बनी है ताकि नीति का प्रत्येक पहलू वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यावसायिक दृष्टिकोण से मजबूत हो। इसमें शामिल प्रमुख सदस्य हैं:
- के. रामचंद्र राव – प्रमुख, ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एवं इंजरी प्रिवेंशन सेंटर, IIT दिल्ली
- सुधेन्दु ज्योति सिन्हा – नीति आयोग में सलाहकार
- दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक
- ट्रांसपोर्ट विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
- बिजली वितरण कंपनियों के प्रतिनिधि
इन विशेषज्ञों की जानकारी और अनुभव से यह समिति एक ठोस, व्यावहारिक और भविष्यदृष्टि ईवी नीति का निर्माण करेगी।
नई नीति का फोकस: ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यवहारिक परिवर्तन
1. CNG से EV की ओर संक्रमण
नई नीति का एक बड़ा उद्देश्य सीएनजी गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक में परिवर्तित करना है। समिति को यह अध्ययन करना होगा कि वर्तमान में दिल्ली की सड़कों पर कितनी सीएनजी वाहन चल रही हैं और उन्हें 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर एक वर्ष में कैसे बदला जा सकता है।
यह केवल एक तकनीकी कार्य नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक सहयोग, सब्सिडी नीति, और जनता की मानसिकता में बदलाव जैसे कई आयाम जुड़े होंगे।
2. फ्लाईओवर के नीचे चार्जिंग स्टेशन
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए जगह ढूंढ़ना एक चुनौती है। इसके समाधान के रूप में सरकार ने फ्लाईओवर के नीचे चार्जिंग पॉइंट्स विकसित करने की योजना बनाई है। यह न केवल उपयोग में लाए गए सार्वजनिक स्थानों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था को भी प्रभावित नहीं करेगा।
समिति यह निर्धारित करेगी कि प्रत्येक वर्ष कितने चार्जिंग पॉइंट्स बनाए जाएं और उन्हें कहां-कहां स्थापित किया जाए।
3. बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन
ईवी वाहनों में प्रयुक्त होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों का जीवन सीमित होता है और उनका अपशिष्ट सही तरीके से प्रबंधित न किया जाए तो यह एक नए प्रकार का पर्यावरणीय खतरा बन सकता है। समिति को बैटरी रीसायक्लिंग और वेस्ट मैनेजमेंट पर एक व्यावहारिक ढांचा विकसित करना होगा।
4. लास्ट माइल कनेक्टिविटी
दिल्ली के भीड़भाड़ वाले और अनधिकृत इलाकों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की पहुँच अब भी सीमित है। समिति को यह तय करना होगा कि किन इलाकों में मिनी कैब्स, ई-रिक्शा और मैक्सी कैब्स को परमिट दिया जाए और किस प्रकार वहाँ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सुनिश्चित किया जाए।
इससे न केवल लोगों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि गैर-प्रदूषणकारी परिवहन विकल्प भी सुलभ होंगे।
5. महिलाओं को प्राथमिकता
ईवी नीति के अंतर्गत मिलने वाली सब्सिडी में महिलाओं को विशेष प्राथमिकता देने की योजना बनाई जा रही है। समिति को यह विश्लेषण करना होगा कि अब तक कितनी महिलाओं को सब्सिडी मिली है, क्या उसमें कोई असमानता रही है और भविष्य में किस वर्ग को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
यह पहल लैंगिक समानता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
हर 15 दिन में रिपोर्टिंग अनिवार्य
यह सुनिश्चित करने के लिए कि नीति निर्माण प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध रहे, समिति को हर 15 दिन में ट्रांसपोर्ट मंत्री पंकज सिंह को प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी। इससे समय पर आवश्यक संशोधन किए जा सकेंगे और नीति को धरातल पर उतारने में कोई विलंब नहीं होगा।
ईवी नीति और अर्थव्यवस्था
ईवी नीति न केवल पर्यावरण बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक ओर जहाँ यह पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम करती है, वहीं दूसरी ओर इससे नई नौकरियों का सृजन भी होता है — जैसे कि बैटरी उत्पादन, चार्जिंग स्टेशन निर्माण, EV रिपेयर वर्कशॉप, ड्राइवर ट्रेनिंग आदि क्षेत्रों में।
सरकार द्वारा सही दिशा में नीतिगत निर्णय लिए जाने पर यह क्षेत्र दिल्ली को “ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल” बनाने की ओर ले जा सकता है, जो पूरे देश के लिए एक उदाहरण होगा।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
- इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी – चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग सेंटर और पार्किंग स्पेस की भारी आवश्यकता है।
- जनता की मानसिकता – अभी भी आम जनता में ईवी के प्रति कई भ्रम और झिझकें हैं।
- लागत – हालांकि सरकार सब्सिडी दे रही है, लेकिन शुरुआती लागत अब भी कई लोगों के लिए बाधा है।
- पावर सप्लाई – EV चार्जिंग से बिजली की मांग बढ़ेगी, जिसके लिए ग्रिड तैयार करना एक चुनौती है।
समापन: दिल्ली की दिशा, देश की दशा
दिल्ली की ईवी नीति केवल एक शहर की योजना नहीं, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकती है। यदि यह नीति सफल होती है तो देश के अन्य राज्य भी इससे प्रेरणा लेकर अपनी नीतियाँ बना सकते हैं।
ईवी ट्रांजिशन केवल पर्यावरण की आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक आवश्यकता भी बन चुका है।
दिल्ली सरकार की यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसका क्रियान्वयन उतना ही गंभीर और सतत प्रयासों की मांग करता है। जब नीति, तकनीक और जनभागीदारी तीनों एकसाथ मिलेंगी, तभी यह मिशन साकार हो सकेगा।
आप क्या सोचते हैं दिल्ली की इस नई ईवी नीति के बारे में? अपनी राय हमें जरूर बताएं।

