नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर शनिवार को एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, “देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है। अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना है, तो संसद और विधानसभा का कोई मतलब नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए।”
निशिकांत दुबे ने यह बयान देते हुए सर्वोच्च न्यायालय पर संसद की संप्रभुता को कमजोर करने और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कानून बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट यदि हर सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे में हस्तक्षेप करेगा, तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है।
इससे पहले भी देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय ‘सुपर संसद’ की तरह व्यवहार कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
दुबे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की संवैधानिक संस्थाओं के बीच अधिकारों की सीमा को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हालिया कुछ मामलों में दिए गए फैसलों के बाद सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं ने अदालत की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
निशिकांत दुबे के बयान से राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। विपक्षी दलों ने इसे न्यायपालिका पर सीधा हमला बताया है, वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सुप्रीम कोर्ट और संसद के बीच अधिकारों की स्पष्ट सीमाओं को लेकर यह बहस नई नहीं है, लेकिन निशिकांत दुबे का यह बयान निश्चित रूप से इस मुद्दे को एक नई दिशा देने वाला है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं।

