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साइबर मोर्चे पर पाकिस्तान की धमकी के बीच सजग रहें: अनजान डॉक्यूमेंट बिल्कुल ना डाउनलोड करें

The KN News, 10 मई 2025

भारत-पाक तनाव के मौजूदा दौर में युद्ध का अगला मैदान इंटरनेट बनता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान-समर्थित हैकर्स ने “ऑपरेशन बुनियान-उल-मरसूस” तथा “ऑपरेशन सालार” जैसी मुहिम के तहत भारतीय सरकारी वेबसाइटों, बिजली ग्रिड और राजनीतिक दलों के पोर्टल पर हमले तेज़ कर दिए हैं। हाल के दिनों में 2,500 से ज़्यादा सीसी-टीवी कैमरे हैक हुए, और सत्ताधारी पार्टी की वेबसाइट तक अस्थायी रूप से ठप कर दी गई।

साइबर अपराध बढ़ने का सीधा खतरा आम उपयोगकर्ताओं पर है। तेलंगाना पुलिस और CERT-In जैसी संस्थाओं ने आगाह किया है कि अज्ञात ई-मेल अटैचमेंट, APK फ़ाइलों और सोशल-मीडिया लिंक के जरिए मैलवेयर और फ़िशिंग अटैक फैलाए जा रहे हैं।

  1. भू-राजनीतिक तनाव: सीमा पार सैन्य कार्रवाई के बाद डिजिटल प्रतिशोध तेज़।
  2. हैक्टिविस्ट नेटवर्क: दोनों देशों के “नैशनलिस्ट” हैकर-ग्रुप डेटा-लीक और साइट-डिफेसमेंट के ज़रिये मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहे हैं।
  3. सोशल-इंजीनियरिंग: पहालगाम हमले की फर्जी PDF रिपोर्ट, ‘सीक्रेट विडियो’ या ‘आपातकालीन नोटिस’ बनाकर भीत्री घुसपैठ की जा रही है।

मोबाइल और सोशल-मीडिया पर 10 ज़रूरी सावधानियाँ

सरकार व एजेंसियों की तैयारी

CERT-In ने वित्तीय और ऊर्जा संचालकों को ‘24×7 मॉनिटरिंग’ व सिम्युलेटेड-फिशिंग ड्रिल के आदेश दिए।

IB व NTRO ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ “साइबर फ्यूज़न सेंटर” सक्रिय किया, जिससे रियल-टाइम IoC (Indicators of Compromise) साझा हो रहे हैं।

राज्य पुलिस साइबर सेल स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चला रही है; डार्क-वेब पर लीक भारतीय डेटा के लिए ट्रैकिंग बढ़ाई गई।

आज हर हाथ में स्मार्ट-फ़ोन है, और यही हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी बन सकता है। पाकिस्तान-समर्थित साइबर ऑपरेशन्स से उपजी चुनौती रोकने के लिए सरकार और सुरक्षा-बल मोर्चा संभाल रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत सतर्कता सबसे पहली रक्षा पंक्ति है। ध्यान रखें—एक अनजाना डॉक्यूमेंट, एक क्लिक, एक इंस्टॉल बटन ही आपके पूरे डिजिटल जीवन पर हमला करने का द्वार खोल सकता है। इसलिए जागरूक रहें, अपडेटेड रहें, और किसी भी संदिग्ध फ़ाइल या लिंक से दूरी बनाए रखें।

(रिपोर्ट: The KN News डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली)

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